उदंती सीतानदी टाईगर रिजर्व में बच्चा पैदा करने के लिए वनभैंसों को खिलाई जाती है सेक्स वर्धक दवाईयाँ, दवाईयों के नशे में वनभैंसे करते है गाँव की भैसियो पर हमले – शिवशंकर सोनपीपरे एवं तीव कुमार सोनी
मैनपुर | उदंती सीतानदी टाईगर रिजर्व के अधिकारियों को वन और वन्य प्राणियों के संरक्षण – संवर्धन से कोइ भी लगाव नहीं है अधिकारियो का पूरा लगाव केवल शासन से मिलने वाला भारी भरकम बजट से ही रहता है | उदंती सीतानदी टाईगर रिजर्व के अधिकारी शासन को वन्य प्राणियों की झूठी जानकारी दे दे कर करोडो का बजट का वारा न्यारा कर चुके है | वर्ष 2005 में वन विभाग के अधिकारियों ने शासन को बताया था की उदंती अभ्यारण्य में 61 वन भैंसे है परन्तु दिल्ली से आये वाईल्ड लाईफ टास्क फ़ोर्स ने जब जांच पड़ताल किया तो उदंती अभ्यारण्य में केवल 7 वन भैंसे ही पाए गए थे | तब से अधिकारियों पर वन भैसों की संख्या बढाने के लिए काफी दबाव है | इसके बाद अधिकारियों ने वन भैसों की संख्या बढाने के लिए वन भैसों को सेक्स वर्धक दवाईया और स्टेराईड खिलाना शुरू कर दिया है ताकि दवाईया खा कर वन भैसे अधिक से अधिक प्रजनन करे और बच्चा पैदा कर वन भैसों की सख्या बढाए |

सेक्स वर्धक दवाईयों के नशे में वनभैंसे गाँव की भैसियो पर हमले करते है
उदंती अभ्यारण्य में कोई भी प्रशिक्षित डाक्टर नहीं है इसलिए सेक्स वर्धक दवाईया कितनी मात्रा में वन भैसों को देना है किसी को पता नहीं है | दवाईयों की मात्रा का ज्ञान नहीं होने के कारण वन भैसों को अधिक मात्रा में सेक्स वर्धक दवाईया दे दिया जाता है | जिसका परिणाम यह होता है की दवाईयों के ओवर डोज से वन भैसों में प्रजनन की तीव्र इच्छा जाग जाती है और वो प्रजनन के लिए घने जंगलों को छोड़ कर ये वनभैंसा ग्रामीण बसाहट के आसपास पालतू भैसों से सहवास करने गांव पहुंचने लगते हैं । शाम होते ही वनभैंसा अंधेरे में सीधे ग्रामीणों के पालतू मवेशियों को रखने का कोठा तक पहुंच जाता है और गाँव की पालतू भैसियो पर सहवास के लिए हमले कर देता है | सहवास के लिए वनभैंसा जुगांड़, कुर्रूभाठा, डूमरपड़ाव, जांगड़ा, पायलीखंड के आसपास आसानी से दिखाई देता रहता है |

कामांध वनभैंसे के हमले से पालतू भैसियो को हो चुका है भारी नुकसान, नहीं मिला मुआवजा
कामांध वनभैंसे के हमले से कई पालतू भैसियो को भारी नुकसान हो चुका है | ग्रामीणों ने वन विभाग से होने वाले जान माल के नुकसान से बचाने की कई बार गुहार लगाई है । वनभैंसा उदंती अभयारण्य के अंदर से गांव की तरफ आ जाते हैं और ग्रामीणों के पालतू मादा भैसों से सहवास करने की कोशिश करते है । इन वनभैंसों का पिछले कुछ वर्षों से गांव की तरफ आना एक सामान्य बात हो गई है लेकिन इससे ग्रामीणो को डर लगा रहता है। पिछले कुछ वर्षों से उदंती अभयारण्य के घने जंगलों निकलकर गांव पहुंचे वनभैंसो ने पालतू भैंसों को काफी नुकसान पहुंचाया है । ग्रामीण लगातार इसके मुआवजे की मांग करते रहे हैं पर नहीं मिला।
सहवास के लिए वनभैसे गाँव की पालतू भैसियो को बंधक बना कर रखते है
उदंती अभयारण्य के अधिकारियों का कहना है की वनभैंसा गांवों के आसपास पालतू मादा भैंसों से संपर्क बनाने पहुंचते हैं। विभाग द्वारा केयर टेकर के माध्यम से प्रत्येक वनभैंसों पर नजर रखी जा रही है। ज्ञात हो की उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र के उदंती अभयारण्य वनभैंसों के नाम से जाना जाता है। उदंती अभयारण्य में शासन द्वारा कक्ष क्रमांक 82 में 32 हेक्टेयर जंगल भूमि को रेस्क्यू सेंटर बनाकर तार का बाड़ा लगाया गया है। इस रेस्क्यू, प्रजनन एवं संवर्धन केंद्र में वनभैसों का संरक्षण व संवर्धन किया जा रहा है। यहां एकमात्र मादा वनभैंसा आशा है। साथ ही दो वर्ष पहले आशा द्वारा जन्मी मादा वनभैंसा खुशी को भी बाड़े के अंदर पाला जा रहा है। विभाग द्वारा मिली जानकारी के अनुसार 6 नर वनभैंसा खुले जंगल में घूम रहे हैं लेकिन खुले जंगल में मादा वनभैंसों को छोड़ा नहीं जाता जिससे सहवास के लिए वनभैंसा गांवों का रूख करते हैं। कई बार तो पालतू भैसें जो जंगल में चरने जाती हैं, उन्हें कई दिनों तक ये वनभैंसे रोक कर रखते हैं।










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