छत्तीसगढ़

शाकंभरी जयंती के अवसर पर शाक सब्जी प्रसाद के रूप में वितरित किया गया – इतेश सोनी जिला ब्यूरो गरियाबंद

इतेश सोनी जिला ब्यूरो प्रमुख गरियाबंद गरियाबंद - कोसरिया मरार पटेल समाज की इष्ट देवी मां अन्नपूर्णा, शाकंभरी की पूजा...

राज्य स्तरीय युवा महोत्सव रायपुर में आस्था विद्या मंदिर के कलाकारों ने दिखाएंगे अपनी जौहर

दंतेवाड़ा/गीदम:- खेल और युवा कल्याण विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के द्वारा प्रदेश की राजधानी रायपु में आयोजित राज्य स्तरीय युवा महोत्सव...

वरिष्ठ पत्रकार अनिल द्विवेदी का छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट यूनियन द्वारा किया गया सम्मान …

बतादे की छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार अनिल द्विवेदी को भारत सरकार के विज्ञापन एवं दृश्य प्रचार निदेशालय एवं लोक संपर्क...

चुनाव नामांकन भरने में पत्नी का सहयोग करना बीआरसीसी अयोध्या राम टांण्डिया को पडा भारी हो रही है उच्च स्तर पर कार्यवाही – इतेश सोनी जिला ब्यूरो गरियाबंद

इतेश सोनी जिला ब्यूरो गरियाबंद जिला कार्यलय में लाइन अटैच किया गया मैनपुर -जनपद सदस्य की प्रत्याशी पत्नी का नामांकन...

नामांकन के आखिरी दिन ग्राम सरकार बनाने दिखा ग्रामीण नेताओ की दम ख़म…

बालोद.. जिले में त्रि स्तरीय पंचायत चुनाव के अधिसूचना जारी होते ही. ग्रामीण नेताओ का दौरा शुरू हो गया है....

एजाज ढेबर के रायुपर महापौर बनने पर मैनपुर में समर्थको ने किया आतिशबाजी मनाई खुशिया – इतेश सोनी जिला ब्यूरो गरियाबंद

इतेश सोनी जिला ब्यूरो प्रमुख गरियाबंद मैनपुर/गरियाबंद । रायपुर नगर निगम के एजाज ढेबर महापौर चुने जाने पर तहसील मुख्यालय...

गरियाबंद नगर पालिका में चुनाव में भाजपा ने मारी बाजी गफ़्फ़ु मेमन बने अध्यक्ष – इतेश सोनी जिला ब्यूरो गरियाबंद

इतेश सोनी जिला ब्यूरो प्रमुख गरियाबंद गरियाबंद:- नगर पालिका चुनाव में आज पार्षदों के शपथ ग्रहण समारोह के बाद हुए...

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा शाम की ओपीडी का निरीक्षण – इतेश सोनी जिला ब्यूरो गरियाबंद

इतेश सोनी जिला ब्यूरो गरियाबंद ज़िद है सच दिखाने की सर्वोच्य छत्तीसगढ़ गरियाबंद/ मैनपुर । स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग...

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” सिनेमा एंड बियांड और नुक्कड़ कैफे द्वारा आयोजित “भारतीय सिनेमा में महिला लेखिकाओं एंव निर्देशकों का योगदान – एम.एल. नत्थानी कवि,लेखक, शिक्षाविद, भारतीय सिनेमा के लगभग 100 साल के इतिहास में महिला लेखिकाओं और निर्देशकों ने अपने कल्पनाशील विचारों एंव आधुनिक दृष्टिकोंण के साथ ही यथार्थवादी धरातल पर पुरुष पात्रों के ” संवेदनशील और साहसी पुरुषत्व ” को सिनेमा के सुनहरे पर्दे पर लगभग प्रत्येक दशक में अपनी अंतर्दृष्टि से रेखांकित किया है । अतीत से वर्तमान कालखंड में अनेक महिला फिल्मकारों ने सिनेमाई रुपहले पर्दे पर पुरानी सोच के रुढ़िवादी पुरुष पात्रों को नए परिवेश में आधुनिक दृष्टिकोंण के साथ ही मानवीय मूल्यों के प्रति संवेदनशील, बुद्धिमान होने के साथ ही अनंत गहराईयों को शिद्दत के साथ जिंदगी को जिन्दादिली के साथ जीने के लिए प्रतिबद्ध है । यह सिनेमाई पर्दे पर महिला फिल्मकारों की नई सोच और सृजन के अद्भुत हस्ताक्षर हैं । भारतीय सिनेमा के शुरूआती कालखंड में महिला फिल्मकारों में साहसी एंव प्रतिभावान फातिमा बेगम और देविका रानी उल्लेखनीय नाम हैं । समय के साथ महिला फिल्मकारों की भूमिका का चित्रण भी निरंतर बदलता रहा है । वस्तुतः सिनेमा के माध्यम से समाज में तेजी से बदलते जीवन मूल्यों को ” पुरुष पात्रों ” को महिला फिल्मकारों ने अपने आधुनिक नजरिए एंव पैनी अंतर्दृष्टि से विवधता के नए आयाम स्थापित किए हैं । महिला फिल्मकारों के सृजनशील सशक्त हस्ताक्षर :- ************************ 1 फातिमा बेगम – बुलबुल ए परिसतान 2 देविका रानी – कर्मा 3 नंदिता दास – फिराक 4 दीपा मेहता – फायर 5 अरुणा राजे – रिहाई 6 कल्पना लाजमी – रूदाली 7 अर्पणा सेन – मिस्टर एंड मिसेज अय्यर 8 मीरा नायर – मानसून वेडिंग 9 गुरविंदर चड्डा – बेंड इट लाइक बेकहम 10 अनुशा रिजवी – पीपली लाईव 11 किरण राव – धोबी घाट 12 भावना तलवार – धरम 13 रीमा कागती – तलाश 14 रेवती – मित्र माई फ्रेंड 15 मेघना गुलजार – तलवार, राजी,छपाक 16 गोरी शिंदे – इंग्लिश विंगलिश 17 जोया अख्तर – लक बाय चांस, जिंदगी ना मिलेगी दोबारा,दिल धड़कने दो 18 फराह खान – ओम शांति ओम, मैं हूं ना 19 कोंकणा सेन शर्मा – अ डेथ इन द गंज 20 लीना यादव – दि एंड निष्कर्ष :- इस तरह से भारतीय सिनेमा का इतिहास महिला फिल्मकारों के सृजनशील और सशक्तिकरण के नित नई सोच और आधुनिक दृष्टिकोंण का बदलता हुआ प्रतिबिंब है । आज महिला फिल्मकारों ने ग्लोबल स्तर पर अच्छे कंटेंट राईटर के कारण सिनेमा और ओटीटी प्लेटफार्म पर भी इस डिजिटल युग में वैश्विक पहचान बनाई है । भारतीय सिनेमा में अब पुरुषों को लेकर नए दृष्टिकोंण और वैश्विक स्तर के कंटेंट राईटर निरंतर सक्रियता के साथ महिला फिल्मकारों ने समाज में क्रांतिकारी बदलाव लाने में आधुनिक तकनीक और विज्ञान के साथ ही नए ” संवेदनशील और साहसी पुरुषत्व ” की सिनेमाई छबि को परिभाषित करने में कामयाब हुए हैं । सादर ।