कुत्तों के अमानक बधियाकरण पर साहित्यकार ने जताई चिंता, पशु संरक्षण और प्रकृति संतुलन पर दिया जोर

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कुत्तों के अमानक बधियाकरण पर साहित्यकार ने जताई चिंता, पशु संरक्षण और प्रकृति संतुलन पर दिया जोर 

कोरबा। जिले के एक केंद्र में कुत्तों के कथित अमानक बधियाकरण से जुड़े वीडियो के सामने आने के बाद साहित्यकार एवं मुकुटधर साहित्य समिति के सचिव डॉ. कृष्ण कुमार चन्द्रा ने गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए मानव, पशु, पक्षी और प्रकृति के बीच बिगड़ते संतुलन पर चिंता जताई है।

डॉ. चन्द्रा ने कहा कि मानव और पालतू पशुओं का संबंध सदियों पुराना है, लेकिन आधुनिक युग में विकास और सुविधाओं की दौड़ में पशु उपेक्षा का शिकार हो गए हैं।

आज अनेक पालतू पशु सड़कों पर भटकने, दुर्घटनाओं, भूख और असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। वहीं जंगलों के लगातार घटने से हाथी, भालू, तेंदुआ और अन्य वन्यजीव आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आने को मजबूर हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि प्रकृति, पशु और पक्षियों का संरक्षण केवल संवेदना का विषय नहीं, बल्कि मानव के अस्तित्व से भी जुड़ा हुआ है। यदि प्राकृतिक संतुलन बिगड़ता रहा तो इसका सबसे अधिक दुष्प्रभाव मानव समाज पर ही पड़ेगा। उन्होंने समाज और प्रशासन से पशुओं के प्रति मानवीय व्यवहार अपनाने तथा प्रकृति संरक्षण के लिए प्रभावी कदम उठाने की अपील की।

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