*आदिवासी संस्कृति के रंग में सराबोर हुआ देवभोग, तीर-कमान के साथ निकली विशाल सांस्कृतिक रैली* *पारंपरिक वेशभूषा, लोकनृत्य और वाद्ययंत्रों ने मोहा मन; महापुरुषों को नमन कर शिक्षा, अधिकार और सामाजिक एकजुटता का दिया संदेश*

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*रिपोर्ट – नागेश्वर मोरे गरियाबंद*

 

देवभोग। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर देवभोग मुख्यालय में आदिवासी समाज द्वारा भव्य एवं उत्साहपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पूरे आयोजन में आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपरा, भाषा, वेशभूषा और सामाजिक एकजुटता की झलक देखने को मिली। बड़ी संख्या में युवक-युवतियां, महिलाएं, बुजुर्ग एवं बच्चे पारंपरिक वेशभूषा धारण कर हाथों में तीर-कमान लेकर विशाल सांस्कृतिक रैली में शामिल हुए। रैली के दौरान देवभोग नगर आदिवासी संस्कृति के रंगों से सराबोर नजर आया।

कार्यक्रम की शुरुआत हाई स्कूल मैदान स्थित कार्यक्रम स्थल पर हुई, जहां समाज के लोगों ने आदिवासी समाज की विरासत और संघर्ष के प्रतीक भगवान बिरसा मुंडा, तात्या भील एवं बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर सहित अन्य महापुरुषों के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया।

कार्यक्रम में अजजा शासकीय सेवक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष आर.एन. ध्रुव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता टेक चंद्र ने की। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष गरियाबंद गौरी शंकर कश्यप, टेकचंद मांझी, धनसिंह मरकाम, लोकेंद्र कोमर्रा, कन्हैया मांझी सहित समाज के अनेक पदाधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

पारंपरिक वेशभूषा और तीर-कमान बने आकर्षण का केंद्र

कार्यक्रम के बाद हाई स्कूल मैदान से विशाल सांस्कृतिक रैली निकाली गई। पारंपरिक वेशभूषा में सजे युवक-युवतियां, महिलाएं और पुरुष हाथों में तीर-कमान लेकर रैली में शामिल हुए। पारंपरिक लोकगीत, लोकनृत्य और वाद्ययंत्रों की मधुर धुनों के बीच निकली रैली ने पूरे नगर का माहौल उत्सवमय बना दिया।

रैली हाई स्कूल मैदान से निकलकर गांधी चौक पहुंची। यहां से गांधी चौक स्थित स्तंभ पर कार्यक्रम के बाद रैली आगे बढ़ी और बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा पर पहुंचकर समाज के लोगों ने पूजा-अर्चना एवं पुष्पांजलि अर्पित की।

लोकनृत्य और पारंपरिक वाद्ययंत्रों ने मोहा मन

रैली के दौरान आदिवासी समाज के पारंपरिक लोकनृत्य, लोकगीत और वाद्ययंत्र विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। पारंपरिक धुनों पर युवक-युवतियों द्वारा प्रस्तुत नृत्य ने लोगों का मन मोह लिया। रैली को देखने के लिए नगर के विभिन्न स्थानों पर नागरिकों की भीड़ जुटी रही। जगह-जगह नागरिकों द्वारा रैली का स्वागत भी किया गया।

इस दौरान प्रतिभागियों ने अपनी सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और सामाजिक एकजुटता का जीवंत प्रदर्शन किया। युवा, महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे सभी उत्साह के साथ आयोजन में शामिल हुए, जिससे पूरे कार्यक्रम में उत्सव जैसा माहौल बना रहा।

संस्कृति संरक्षण के साथ शिक्षा और अधिकारों का संदेश

आयोजन का मुख्य उद्देश्य आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, भाषा, परंपराओं एवं लोक कलाओं के संरक्षण और संवर्धन के साथ-साथ समाज के अधिकारों एवं सामाजिक जागरूकता का संदेश देना रहा। कार्यक्रम में वक्ताओं ने समाज के लोगों से शिक्षा को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही समाज के विकास और आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य की सबसे मजबूत आधारशिला है।

कार्यक्रम के दौरान सामाजिक एकता, अपनी संस्कृति और परंपराओं को सहेजने तथा युवा पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ने पर भी जोर दिया गया।

एकजुटता और स्वाभिमान का दिखा संदेश

विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में आदिवासी समाज ने अपनी सांस्कृतिक पहचान, परंपराओं, एकजुटता और स्वाभिमान का परिचय दिया। पारंपरिक वेशभूषा से सजी रैली और लोक संस्कृति की प्रस्तुतियों ने देवभोग नगर में आदिवासी संस्कृति की एक अलग ही छटा बिखेर दी।

पूरे आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में समाज के लोगों की मौजूदगी रही और कार्यक्रम उत्साह, उमंग एवं सामाजिक एकजुटता के वातावरण में संपन्न हुआ।

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