
*खबर का असर: जर्जर स्कूल भवन की खबर के बाद जागा प्रशासन, 32 बच्चों को मिलेगी वैकल्पिक कक्षा*
*भाजपा शिक्षा प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों ने स्कूल पहुंचकर जताई चिंता, निरीक्षण पर पहुंचे बीईओ ने किया वैकल्पिक व्यवस्था*
*रिपोर्ट – नागेश्वर मोरे, गरियाबंद*
देवभोग- सुकलीभाटा पंचायत के आश्रित ग्राम बंदपारा स्थित शासकीय स्कूल के जर्जर भवन को लेकर प्रकाशित खबर का बड़ा असर देखने को मिला है। खबर सामने आने के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आया और विकासखंड शिक्षा अधिकारी नीलांबर कश्यप ने मौके पर पहुंचकर जर्जर स्कूल भवन का निरीक्षण किया। भवन की स्थिति को गंभीर बताते हुए उन्होंने बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं।
गौरतलब है कि बंदपारा स्कूल भवन की हालत लंबे समय से जर्जर बनी हुई थी। भवन की छत और अन्य हिस्से खराब हो चुके हैं। ऐसे में यहां अध्ययनरत 32 नन्हे बच्चे जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने को मजबूर थे। जर्जर भवन के बीच बच्चों का भविष्य संवारने की कोशिश की जा रही थी, जिससे कभी भी अप्रिय घटना की आशंका बनी हुई थी।
*भाजपा शिक्षा प्रकोष्ठ के पदाधिकारी पहुंचे स्कूल*
खबर प्रकाशित होने के बाद भाजपा शिक्षा प्रकोष्ठ के जिला मीडिया प्रभारी नागेश्वर मोरे, भाजपा मंडल मंत्री लैबानो सोना एवं चरण सिंह क्षेत्रपाल बंदपारा स्कूल पहुंचे। उन्होंने मौके पर स्कूल भवन की स्थिति का जायजा लिया और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई।
पदाधिकारियों ने इस संबंध में विकासखंड शिक्षा अधिकारी नीलांबर कश्यप से चर्चा करते हुए जर्जर भवन में बच्चों की कक्षाएं संचालित नहीं कराने तथा जल्द से जल्द वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराने का आग्रह किया।
*बीईओ ने मौके पर पहुंचकर लिया जायजा*
मामले की गंभीरता को देखते हुए विकासखंड शिक्षा अधिकारी नीलांबर कश्यप स्वयं बंदपारा स्कूल पहुंचे और भवन की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण किया। जर्जर भवन को देखकर उन्होंने बच्चों की सुरक्षा को लेकर तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था करने की बात कही।
बीईओ ने संबंधित पंचायत प्रतिनिधियों से चर्चा करते हुए कहा कि जब तक स्कूल भवन की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो जाता, वैकल्पिक व्यवस्था कर अन्य भवन में बच्चों की कक्षाएं संचालित की जाएंगी, ताकि बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित न हो और उनकी सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सके।
*जिला शिक्षा अधिकारी से भी हुई चर्चा*
इस पूरे मामले को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी राजेश चंद्राकर से भी चर्चा हो चुकी है। शिक्षा विभाग की ओर से जल्द ही स्कूल के लिए अतिरिक्त कक्ष उपलब्ध कराने की उम्मीद जताई जा रही है। इससे जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर बच्चों को बड़ी राहत मिलने की संभावना है।
*ग्राम पंचायत के सरपंच ने भी जताई चिंता*
सुकलीभाटा पुराना के सरपंच जजेंन कुमार महानंद ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। जर्जर भवन में बच्चों को पढ़ाना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है। साथ ही उन्होंने कहा कि इसके पूर्व जो ब्लॉक शिक्षा अधिकारी देवनाथ बघेल से भी इस भवन से संबंधित चर्चा हो चुकी पर उनके द्वारा किसी प्रकार का ध्यान नहीं दिया गया इसलिए आज पर्यंत बच्चे जर्जर भवन में बच्चे पढ़ने को मजबूर हैं उन्होंने कहा कि जब तक भवन का समाधान नहीं हो जाता, तब तक बच्चों की पढ़ाई के लिए वैकल्पिक तौर पर भवन की व्यवस्था की गई है ताकि बच्चों के पढ़ाई पर कोई प्रभाव न पड़े। इससे बच्चे सुरक्षित वातावरण में अपनी पढ़ाई जारी रख सकेंगे और अपना भविष्य गढ़ सकेंगे।
*खबर के बाद मिली राहत*
आपको बता दें कि एक दिन पहले बंदपारा स्कूल की बदहाल स्थिति को लेकर भारत टाइम्स न्यूज़ में खबर प्रकाशित की गई थी। खबर में बताया गया था कि स्कूल भवन की छत एवं अन्य हिस्से जर्जर हो चुके हैं और इसके बावजूद 32 बच्चे मजबूरी में उसी भवन में पढ़ाई कर रहे थे। जर्जर भवन के कारण बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे थे।
खबर प्रकाशित होने के बाद शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया और बीईओ नीलांबर कश्यप ने तत्काल मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। अब भवन की मरम्मत अथवा स्थायी व्यवस्था होने तक वैकल्पिक तौर पर स्कूल संचालित करने की पहल की जा रही है।
स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने भी प्रशासन की इस पहल का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि बच्चों को जल्द ही सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलेगा।
फिलहाल प्रशासन की त्वरित पहल से बंदपारा स्कूल के 32 बच्चों को जर्जर भवन के खतरे से राहत मिलने की उम्मीद जगी है। अब देखना होगा कि वैकल्पिक व्यवस्था कितनी जल्दी धरातल पर उतरती है और स्कूल भवन के स्थायी समाधान की दिशा में विभाग कब तक ठोस कदम उठाता है।





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