बेजुबान पशुओं की पीड़ा पर संवेदनशील पहल की अपील
कोरबा। समाजसेवी डी. एस. ने अपनी रचना “मूक पीड़ा” के माध्यम से बेजुबान पशुओं के प्रति संवेदनशीलता और उनके संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि पशु भी प्रकृति की अनमोल धरोहर हैं और उन्हें भी दर्द व पीड़ा का उतना ही एहसास होता है जितना इंसानों को।
रचना में उन्होंने शासन-प्रशासन से पशुओं के संरक्षण एवं कल्याण के लिए सशक्त और प्रभावी योजनाएं लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि इंसानों का कर्तव्य केवल अपने हितों की रक्षा करना नहीं, बल्कि बेजुबान जीवों के जीवन और अधिकारों की भी सुरक्षा करना है।
डी. एस. ने संदेश दिया कि सभी जीव प्रकृति की संतान हैं और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने समाज से पशुओं के प्रति दया, करुणा और संरक्षण की भावना अपनाने की अपील की।












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