रायपुर का ऐतिहासिक सर्किट हाउस बना भ्रष्टाचार का शिकार, अब खंडहर और गड्ढों में तब्दील 
रायपुर। राजधानी रायपुर के सिविल लाइन इलाके में स्थित सौ साल पुराना ऐतिहासिक सर्किट हाउस, जिसे अंग्रेजों के जमाने की धरोहर माना जाता था, आज बदहाली का शिकार होकर खंडहर में तब्दील हो गया है। एक साल पहले इसे तोड़ दिया गया था, जिसके बाद से यह जगह ऊबड़-खाबड़ गड्ढों और बेतरतीब पार्किंग स्थल के रूप में पड़ी हुई है। 
इस सर्किट हाउस को तोड़े जाने का सीनियर सिटीजन, सांस्कृतिक धरोहर प्रेमियों और आरटीआई एक्टिविस्टों ने कड़ा विरोध किया था। उनका कहना था कि यह रायपुर की शान और ऐतिहासिक पहचान था। बावजूद इसके, उस समय कार्यरत एक्जीक्यूटिव इंजीनियर राजीव नशीने ने सभी विरोधों को नज़रअंदाज़ कर भवन को गिरवा दिया। 
भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे इंजीनियर
राजीव नशीने पिछले 25 सालों से रायपुर में पदस्थ हैं और इस दौरान कई सरकारें आईं, लेकिन उनका ट्रांसफर कभी नहीं हुआ। यही वजह है कि उन पर सत्ता और पद का दुरुपयोग कर भ्रष्टाचार करने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। 
स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि राजीव नशीने को “भ्रष्टाचार की मूर्ति” कहा जाने लगा है। आरोप है कि रायपुर से लेकर नागपुर तक उनकी करोड़ों की संपत्तियां हैं, जिनकी जांच होना ज़रूरी है। सवाल यह उठता है कि एक सरकारी अधिकारी की वेतन आय के मुकाबले इतनी बड़ी संपत्ति कैसे खड़ी हो गई?
स्थानीय लोगों की नाराज़गी
सिविल लाइन का यह सर्किट हाउस अब गड्ढों से भरे अस्थायी पार्किंग स्थल में तब्दील हो चुका है। यहां न कोई योजना है, न कोई सुविधा। गाड़ियां बेतरतीब ढंग से खड़ी रहती हैं, जिससे क्षेत्रवासियों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है।
लोगों का कहना है कि यदि आगे की कोई ठोस योजना ही नहीं थी तो आखिर इतनी बड़ी धरोहर को क्यों तोड़ा गया? आज यह जगह श्मशान जैसी वीरान लगती है, जबकि कभी यह शहर की शान हुआ करती थी।
जनता की प्रमुख मांगें
धरोहर को पुनः स्थापित किया जाए।
एक्जीक्यूटिव इंजीनियर राजीव नशीने पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच हो।
अधिकारी की संपत्ति का ऑडिट कर यह देखा जाए कि नौकरी के दौरान उनकी आय और वर्तमान संपत्ति में कितना अंतर है।
जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
सांस्कृतिक धरोहर का महत्व
जानकारों का कहना है कि रायपुर का यह सर्किट हाउस न केवल प्रशासनिक उपयोग के लिए अहम था, बल्कि यह शहर के इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक भी था। इसे संरक्षित करने की बजाय तोड़ दिया गया, जो शहर की विरासत के साथ अन्याय है।
सांस्कृतिक धरोहर प्रेमियों का कहना है कि यदि सरकार इसे आधुनिक रूप में फिर से विकसित करना चाहती थी, तो पहले से स्पष्ट योजना होनी चाहिए थी। लेकिन बिना किसी ठोस प्लानिंग के धरोहर को गिरा देना जनता के साथ धोखा है।
आगे क्या होगा?
अब सवाल यह है कि क्या यह मामला पीडब्ल्यूडी मंत्री और उच्च अधिकारियों तक पहुंचने के बाद कोई ठोस कार्रवाई होगी या नहीं। क्या राजीव नशीने का ट्रांसफर किया जाएगा? क्या उनकी संपत्ति की जांच होगी? या फिर यह ऐतिहासिक धरोहर यूं ही खंडहर और गड्ढों में तब्दील रह जाएगी?
रायपुर की जनता और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि सरकार को इस मामले में जल्द से जल्द कदम उठाना चाहिए। क्योंकि यह केवल एक भवन नहीं था, बल्कि रायपुर की पहचान और इतिहास का प्रतीक था।
यह खबर केवल भ्रष्टाचार और लापरवाही का मामला नहीं, बल्कि रायपुर की ऐतिहासिक धरोहर से खिलवाड़ का ज्वलंत उदाहरण है। अब देखना यह है कि आने वाले समय में सरकार इसे सुधारने और न्याय दिलाने के लिए क्या कदम उठाती है।






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