परिवहन की आड़ में अवैध उत्खनन, नकपुरा के ग्रामीणों ने उठाए सवाल
चंडी मंदिर और दर्री तालाब क्षेत्र में मुरूम परिवहन अनुमति को लेकर विरोध, जांच की मांग तेज
आरंग/रायपुर।
आरंग विकासखंड के ग्राम नकपुरा स्थित दर्री तालाब और चंडी मंदिर के समीप प्रस्तावित मुरूम परिवहन एवं उत्खनन को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। गांव के जागरूक नागरिकों ने प्रशासन को पूर्व में ही लिखित शिकायत देकर आगाह किया था कि परिवहन अनुमति की आड़ में अवैध उत्खनन की तैयारी की जा रही है। अब ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
ग्रामीणों द्वारा खनिज विभाग रायपुर को दिए गए आवेदन में कहा गया है कि दर्री तालाब एवं चंडी मंदिर के आसपास वर्षों से न तो मनरेगा के तहत कोई गहरीकरण कार्य हुआ है और न ही ऐसा कोई निर्माण कार्य किया गया है, जिससे परिवहन योग्य अतिरिक्त मुरूम या ओवरबर्डन उपलब्ध हो। इसके बावजूद पंचायत से प्रस्ताव लेकर परिवहन अनुमति की प्रक्रिया शुरू किए जाने से ग्रामीणों में संदेह गहरा गया है।
आवेदन में आरोप लगाया गया है कि कुछ लोगों द्वारा कथित रूप से भ्रामक जानकारी एवं कूट रचित दस्तावेजों के आधार पर परिवहन अनुमति प्राप्त करने का प्रयास किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि परिवहन के नाम पर वास्तव में उत्खनन की जमीन तैयार की जा रही है, जिससे भविष्य में तालाब क्षेत्र और धार्मिक स्थल के आसपास पर्यावरणीय एवं सामाजिक संतुलन प्रभावित हो सकता है।
ग्रामीणों ने दावा किया है कि उन्होंने 18 मई 2026 को ही खनिज विभाग को लिखित रूप से संभावित अनियमितताओं और आशंकाओं की जानकारी दे दी थी। इसके बावजूद यदि संबंधित प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो विभागीय कार्यप्रणाली और प्रशासनिक जवाबदेही पर प्रश्न उठना स्वाभाविक होगा।
गांव के बुजुर्गों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह केवल मुरूम या मिट्टी का विषय नहीं, बल्कि आस्था, पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा से जुड़ा मामला है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित लोगों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच।
परिवहन अनुमति जारी करने से पहले स्थल का भौतिक सत्यापन।
चंडी मंदिर एवं दर्री तालाब क्षेत्र के पर्यावरणीय संरक्षण की व्यवस्था।
दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई।
ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों और धार्मिक आस्था से जुड़े स्थल को नुकसान पहुंच सकता है।











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