*देवभोग में महाप्रभु की भक्ति का अनोखा उत्सव, मौसी मां के घर रोज लग रहा भंडारा*

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*देवभोग में महाप्रभु की भक्ति का अनोखा उत्सव, मौसी मां के घर रोज लग रहा भंडारा*

**रिपोर्ट – नागेश्वर मोरे, गरियाबंद*

 

*देवभोग-* भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के बाद जब महाप्रभु अपने मौसी मां के घर पहुंचते हैं, तब देवभोग क्षेत्र में भी भक्ति और श्रद्धा का माहौल देखने को मिलता है। रथ यात्रा के दिन जब भगवान जगन्नाथ अपने घर से मौसी घर के लिए निकले तो उनकी अगुवाई करने के लिए अवस्थी परिवार फूलमालाओं के साथ स्वागत किया। इसी धार्मिक परंपरा के तहत महाप्रभु के मौसी मां के घर आगमन के साथ ही क्षेत्र में भक्तों द्वारा जगह-जगह भंडारे का आयोजन शुरू कर दिया गया है। भक्तजन श्रद्धा और उत्साह के साथ भगवान जगन्नाथ की पूजा-अर्चना कर प्रसाद वितरण कर रहे हैं।

भगवान जगन्नाथ को मौसी घर आए आज तीन दिन हो चुके है जहां प्रतिदिन अलग-अलग भक्तों के द्वारा भंडारा आयोजन किया जा रहा है जिसमें पहले दिन ही श्री दुर्गाचरण अवश्थी के द्वारा भंडारा आयोजन किया गया उसके पश्चात इसी क्रम में शनिवार एवं रविवार को पार्षद खीरलक्ष्मी सिन्हा एवं अमलीपदर निवासी रोशन लाल अवस्थी द्वारा श्रद्धालुओं एवं भक्तों के लिए भंडारे का आयोजन किया गया। भंडारे में बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। इस दौरान श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला और पूरा वातावरण भगवान जगन्नाथ की भक्ति से सराबोर नजर आया।

*भगवान जगन्नाथ से देवभोग का वर्षों पुराना धार्मिक संबंध*

देवभोग क्षेत्र का भगवान जगन्नाथ और ओडिशा के पुरी धाम से वर्षों पुराना धार्मिक एवं आध्यात्मिक संबंध माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, देवभोग क्षेत्र से भगवान जगन्नाथ के लिए भोग भेजे जाने की परंपरा रही है। इसी धार्मिक मान्यता और परंपरा के कारण इस स्थान का नाम ‘देवभोग’ पड़ा, ऐसा क्षेत्र के बुजुर्गों और स्थानीय लोगों का मानना है।
देवभोग की धार्मिक पहचान केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि भगवान जगन्नाथ की आस्था से इसका जुड़ाव क्षेत्रवासियों के लिए गौरव का विषय है। स्थानीय लोगों के अनुसार, जगन्नाथ पुरी धाम में स्थित भगवान महाप्रभु के मंदिर की दक्षिण दिशा की ओर देवभोग का नाम अंकित होने की भी मान्यता है। यही वजह है कि देवभोग क्षेत्र के लोगों के बीच भगवान जगन्नाथ के प्रति विशेष आस्था और श्रद्धा देखने को मिलती है।

*ऐतिहासिक मंदिर और भोग की परंपरा से जुड़ी है आस्था*

देवभोग का ऐतिहासिक मंदिर भी क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, इस मंदिर से भगवान जगन्नाथ के लिए प्रसाद और भोग भेजे जाने की परंपरा रही है। भगवान जगन्नाथ से जुड़े इस धार्मिक इतिहास और परंपरा को लेकर क्षेत्रवासियों में गहरी आस्था है।
रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ के मौसी मां के घर पहुंचने के अवसर पर देवभोग क्षेत्र में श्रद्धालुओं द्वारा भंडारे का आयोजन करना इसी धार्मिक परंपरा और आस्था का हिस्सा माना जाता है। भक्तों का मानना है कि महाप्रभु की सेवा और उनके भक्तों को प्रसाद ग्रहण कराना पुण्य का कार्य है। इसी भावना के साथ श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार भंडारा आयोजित कर लोगों को प्रसाद वितरित करते हैं।

*जगन्नाथ मंदिर समिति ने बताया देवभोग की धार्मिक महत्ता*

भगवान जगन्नाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष देवेंद्र बेहरा ने कहा कि देवभोग की धार्मिक महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां की आस्था, परंपरा और संस्कृति भगवान जगन्नाथ से जुड़ी हुई है। भगवान जगन्नाथ केवल ओडिशा ही नहीं, बल्कि पूरे देश और विश्वभर में श्रद्धा एवं भक्ति के केंद्र हैं। देवभोग क्षेत्र की जनता के लिए यह गौरव की बात है कि इस क्षेत्र का संबंध भगवान जगन्नाथ की परंपरा से जुड़ा हुआ माना जाता है।
उन्होंने कहा कि रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ के मौसी मां के घर पहुंचने पर भक्तों द्वारा भंडारा आयोजित करना वर्षों से चली आ रही धार्मिक भावना का प्रतीक है। इस तरह के आयोजन समाज में आपसी भाईचारा, सेवा और सद्भाव की भावना को भी मजबूत करते हैं।

*भक्तिभाव के साथ हो रहे धार्मिक आयोजन*

महाप्रभु के मौसी मां के घर आगमन के अवसर पर देवभोग क्षेत्र में श्रद्धालुओं द्वारा प्रतिदिन भंडारे का आयोजन भी किए जा रहे हैं। भक्तजन बड़ी संख्या में शामिल होकर भगवान जगन्नाथ की आराधना कर रहे हैं। भंडारे में सभी वर्गों के लोग पहुंचकर प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं।
इस अवसर पर भगवान जगन्नाथ मंदिर समिति के उपाध्यक्ष सुरेश बेहरा सहसचिव अनिल बेहरा, कोषाध्यक्ष जोगेंद्र बेहरा, सचिव सुशील बेहरा साथ ही अवस्थी परिवारों में श्री दुर्गा चरण अवस्थी, लक्ष्मी नारायण अवस्थी, प्रमेश अवस्थी, रोशन लाल अवस्थी एवं अवस्थी परिवार सहित समिति के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
देवभोग में भगवान जगन्नाथ से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं और परंपराएं आज भी लोगों की आस्था का केंद्र बनी हुई हैं। रथयात्रा के अवसर पर आयोजित होने वाले भंडारे और धार्मिक कार्यक्रम इसी जीवंत परंपरा को आगे बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं।

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