छत्तीसगढ़ में कांग्रेस और मीडिया के बीच टकराव: संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला पर पत्रकारों का फूटा गुस्सा
रायपुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस इस समय गंभीर राजनीतिक और संगठनात्मक संकट के दौर से गुजर रही है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार पर लगे भ्रष्टाचार और घोटालों के आरोपों से पार्टी पहले ही दबाव में है। ईडी, सीबीआई और एंटी करप्शन ब्यूरो की ताबड़तोड़ कार्रवाइयों ने कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं को कठघरे में खड़ा कर दिया है। वहीं हाल ही में भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी ने पार्टी को और अधिक संकट में डाल दिया है।
ऐसे समय में जब पार्टी को मीडिया के सहयोग की सबसे अधिक आवश्यकता है, कांग्रेस के संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला का रवैया मीडिया के साथ टकराव की स्थिति उत्पन्न कर रहा है। पत्रकारों द्वारा कांग्रेस नेताओं पर आधारित खबरें प्रकाशित करने पर शुक्ला द्वारा कानूनी नोटिस भेजे जाने से राज्य के मीडिया संगठनों में व्यापक असंतोष है।
*पत्रकारों को नोटिस, मीडिया का तीखा विरोध*
हाल ही में वरिष्ठ पत्रकार विप्लव दत्ता को भेजे गए नोटिस ने विवाद को और बढ़ा दिया है। पत्रकार संगठनों का कहना है कि यह मीडिया की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है। लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहे जाने वाले मीडिया को खबरें दिखाने का अधिकार और कर्तव्य दोनों है।
पत्रकारों का आरोप है कि सुशील शुक्ला द्वारा भेजे गए नोटिस सिर्फ आलोचना से बचने की कोशिश हैं, जो किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में अस्वीकार्य हैं।
*प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की प्रतिक्रिया*
मीडिया विवाद के बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज से जब पत्रकार संगठनों ने बात की तो उन्होंने माना कि यह रवैया अनुचित है और पार्टी इस पर उचित निर्णय लेगी। सूत्रों के अनुसार, पार्टी के कई वरिष्ठ नेता भी सुशील आनंद शुक्ला के व्यवहार से नाराज हैं और इसे कांग्रेस की छवि के लिए नुकसानदायक मानते हैं।
*राधिका खेड़ा प्रकरण फिर चर्चा में*
इस विवाद ने राधिका खेड़ा मामले को भी फिर से चर्चा में ला दिया है। कांग्रेस नेत्री राधिका खेड़ा के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला पहले भी सुशील शुक्ला की छवि को नुकसान पहुंचा चुका है। अब पत्रकारों के साथ हो रहे व्यवहार ने स्थिति और गंभीर बना दी है।
*क्या नोटिस पार्टी की सहमति से भेजे गए?*
एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि पत्रकार विप्लव दत्ता को भेजा गया कानूनी नोटिस क्या कांग्रेस नेतृत्व की सहमति से भेजा गया या यह संचार प्रमुख की व्यक्तिगत पहल थी? रिपोर्ट के अनुसार, जिस खबर को लेकर नोटिस भेजा गया, उसमें यह कहा गया था कि सुशील आनंद शुक्ला केवल पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के करीबी हैं और अन्य नेताओं की अनदेखी करते हैं। खबर में प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत, पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल और टीएस सिंहदेव की नाराजगी का भी उल्लेख किया गया था।
*पत्रकार संगठनों की मांग – माफी और कार्रवाई*
छत्तीसगढ़ के प्रमुख पत्रकार संगठनों ने मांग की है कि सुशील आनंद शुक्ला को माफी मांगनी चाहिए और सभी कानूनी नोटिस तुरंत वापस लेने चाहिए। यदि कांग्रेस नेतृत्व इस विवाद को गंभीरता से नहीं लेता, तो इससे मीडिया और पार्टी के बीच दूरी और बढ़ सकती है, जो कांग्रेस के लिए नुकसानदायक सिद्ध होगा।
*राष्ट्रीय नेतृत्व को भेजी गई शिकायत*
जानकारी के अनुसार, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और सोनिया गांधी को पत्र लिखकर सुशील आनंद शुक्ला को पद से हटाने की मांग की गई है। पार्टी के अंदरखाने से खबरें आ रही हैं कि शुक्ला केवल भूपेश बघेल गुट के भरोसेमंद माने जाते हैं और बाकी वरिष्ठ नेताओं को नजरअंदाज करते हैं।
*मायने- कांग्रेस के लिए नया संचार संकट*
जब कांग्रेस विपक्ष में रहकर संगठन को मजबूत करने और जनसंपर्क बढ़ाने की कोशिश कर रही है, ऐसे में संचार प्रमुख की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। लेकिन जिस तरह से सुशील आनंद शुक्ला का मीडिया के साथ टकराव बढ़ रहा है, वह न केवल पार्टी की छवि को नुकसान पहुँचा रहा है बल्कि एक नया राजनीतिक और नैतिक संकट भी खड़ा कर रहा है।















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