छत्तीसगढ़ कांग्रेस में गुटबाज़ी चरम पर, चरणदास महंत की पोस्ट ने बढ़ाई हलचल — भूपेश बघेल का फोटो गायब

Spread the love

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में गुटबाज़ी चरम पर, चरणदास महंत की पोस्ट ने बढ़ाई हलचल — भूपेश बघेल का फोटो गायब

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में कांग्रेस पार्टी एक बार फिर अंदरूनी खींचतान और गुटबाज़ी को लेकर सुर्खियों में है। मामला इस बार सावन मास की बधाई पोस्ट से जुड़ा है, जिसे प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष डॉक्टर चरणदास महंत ने सोशल मीडिया पर साझा किया। पोस्ट में कांग्रेस के तमाम शीर्ष नेताओं की तस्वीरें लगी हैं, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का फोटो नदारद है।

इस तस्वीर ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। राजनीतिक विश्लेषक इसे छत्तीसगढ़ कांग्रेस में चल रही गुटबाज़ी का जीता-जागता उदाहरण मान रहे हैं।

भूपेश बघेल को लेकर पार्टी में नाराज़गी

सूत्रों की मानें तो छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद सारा ठीकरा पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के सिर फोड़ा गया। पार्टी के भीतर और केंद्रीय नेतृत्व के स्तर पर भूपेश बघेल के शासनकाल में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलता के आरोप लगे। कहा गया कि बघेल सरकार के कार्यकाल में प्रदेश की छवि को गंभीर नुकसान हुआ।

यही वजह है कि केंद्रीय नेतृत्व ने भी बघेल से दूरी बनानी शुरू कर दी। हालांकि, उन्हें संगठन में महासचिव पद देकर पंजाब का प्रभारी नियुक्त किया गया है। जानकारों का कहना है कि यह नियुक्ति उन्हें छत्तीसगढ़ की राजनीति से दूर करने की रणनीति का हिस्सा है।

चरणदास महंत की पोस्ट ने खोली दरार

सावन मास की बधाई संदेश वाली पोस्ट में राहुल गांधी, सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, मल्लिकार्जुन खड़गे समेत कई कांग्रेस नेताओं के फोटो हैं, लेकिन भूपेश बघेल की तस्वीर शामिल नहीं है।

राजनीतिक गलियारों में इसे एक स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि अब छत्तीसगढ़ कांग्रेस के बड़े नेता भी भूपेश बघेल से दूरी बना रहे हैं। इस तस्वीर को लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।

कांग्रेस में दो गुट, क्या भविष्य में टूट?

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में फिलहाल दो खेमे नजर आ रहे हैं — एक भूपेश बघेल समर्थक और दूसरा चरणदास महंत व अन्य वरिष्ठ नेताओं का। चुनाव के बाद से ही इन दोनों गुटों के बीच तकरार चल रही है, जो अब खुलकर सामने आने लगी है।

राजनीतिक पंडितों की मानें तो अगर पार्टी ने जल्द ही इस मतभेद को नहीं सुलझाया, तो आने वाले दिनों में कांग्रेस की छवि और संगठनात्मक स्थिति और भी कमजोर हो सकती है।

 

मायने

सावन मास की एक बधाई पोस्ट ने छत्तीसगढ़ कांग्रेस के अंदरूनी मतभेद को उजागर कर दिया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी हाईकमान इस पूरे विवाद पर क्या रुख अपनाता है और क्या भूपेश बघेल की संगठन में वापसी की कोई सूरत बनती है या नहीं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *