छत्तीसगढ़ के जंगल सफारी में राजनीति का नया खेल: वन कर्मचारियों का अखाड़ा, जंगल की सुरक्षा पर सवाल 
छत्तीसगढ़ के जंगलों में इन दिनों एक अजीब सी हलचल है। पर यह हलचल बाघों की दहाड़, हिरणों की दौड़ या बंदरों की उछल-कूद से नहीं है। जंगल विभाग एक नया वृक्षारोपण किया जा रहा है “कर्मचारी राजनीतिक वृक्षारोपण”। रायपुर के जंगल सफारी का एक सरकारी कार्यालय अचानक राजनीति का अखाड़ा बन गया है।
जंगल सफारी रायपुर के परिसर के अंदर अब वन कर्मचारियों का नवीन कर्मचारी भवन का कार्यालय बना दिया गया है। बताया जा रहा है कि यह अनोखा प्रयोग छत्तीसगढ़ के प्रधान वन संरक्षक और वन बल प्रमुख श्रीनिवास राव के कार्यकाल में हुआ है। सूत्र बताते हैं कि जंगलों की रक्षा के लिए बने कार्यालय में अब बहस, बयानबाजी, रणनीति और राजनीतिक शतरंज की चालें चली जाएंगी।
जंगल सफारी में ‘राजनीतिक सफारी’! रायपुर डिवीजन के जंगल सफारी कार्यालय परिसर में वन विभाग का एक कार्यालय है, जो अब कथित रूप से विभाग के वन कर्मचारियों के लिए राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बन गया है। खबर है कि इस कार्यालय में बैठकर अब शासकीय योजनाओं का क्रियान्वयन कम और राजनीतिक समीकरण ज्यादा बनाए जाएंगे।
लोकल कर्मचारियों के बीच इस फैसले को लेकर चर्चा का माहौल गर्म है। कोई मजाक में कह रहा है— “अब जंगल की सुरक्षा फाइलों में होगी और राजनीति जंगल सफारी के कार्यालय में।” कुछ कर्मचारियों का कहना है कि यह जगह इतनी सुविधाजनक बना दी गई है कि यहां आने वाला व्यक्ति आराम से बैठ सकता है, बहस कर सकता है, भोजन कर सकता है और चाहें तो झपकी भी ले सकता है।
शेर भी हैरान, हिरण भी परेशान! जंगल सफारी के जानवरों तक को शायद यह समझ नहीं आ रहा होगा कि आखिर यह क्या हो रहा है। एक कर्मचारी ने हंसते हुए कहा— “अगर यही हाल रहा तो जल्द ही जंगल सफारी का नाम बदलकर ‘राजनीतिक सफारी पार्क’ रखना पड़ेगा।”
कर्मचारियों के अनुसार पहले जंगल सफारी कार्यालय का उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता का केंद्र था, लेकिन अब यहां राजनीतिक रणनीति का नया अध्याय शुरू होता दिखाई दे रहा है। ‘कार्यालय या राजनीतिक कैंप?’ सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस परिसर में रुकने-खाने और आराम करने की भी व्यवस्था की गई है। यानी यहां आने वाला व्यक्ति सिर्फ चर्चा ही नहीं करेगा बल्कि आराम से “राजनीतिक तपस्या” भी कर सकेगा।
एक कर्मचारी ने मजाक में कहा— “अब जंगल सफारी कार्यालय परिसर में योगा कैंप नहीं, राजनीतिक कैंप लगेंगे।” दूसरे कर्मचारी ने कहा— “अगर सभी विभागों ने ऐसा ही किया तो सरकारी कार्यालयों में काम कम और राजनीति ज्यादा होगी।”
सवालों के घेरे में कार्यशैली प्रधान वन संरक्षक श्रीनिवास राव की कार्यशैली पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि उनके कार्यकाल में कई फैसले ऐसे हुए हैं जिन पर चर्चा और विवाद दोनों हुए। कुछ लोगों का कहना है कि अगर उनके पूरे कार्यकाल के दौरान चल-अचल संपत्ति की जांच हो जाए तो कई रहस्य सामने आ सकते हैं।
जंगल की नई कहानी! जंगलों की दुनिया हमेशा रहस्यमयी रही है, लेकिन छत्तीसगढ़ के इस जंगल सफारी में अब एक नई कहानी लिखी जा रही है। यहां पेड़ों की छांव में अब सिर्फ पक्षियों की चहचहाहट नहीं बल्कि राजनीतिक चर्चाओं की गूंज भी सुनाई दे सकती है। एक कर्मचारी ने अंत में मुस्कुराते हुए कहा— “जंगल में पहले शेर राजा होता था, अब लगता है नेता राजा बनने की तैयारी कर रहे हैं।”


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