छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम में पेपर खरीदी में भ्रष्टाचार के आरोप 
रायपुर – छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम, रायपुर में निःशुल्क पुस्तकों के आंतरिक पृष्ठ मुद्रण हेतु क्रय किये जाने वाले पेपर पर भ्रष्टाचार करने हेतु पेपर मिलों के अनुकूल निविदा आमंत्रित किये जाने की शिकायत की गई है।
शिकायतकर्ता शेष नारायण शर्मा ने आरोप लगाया है कि निगम के द्वारा शिक्षा सत्र 2026-27 के लिए निःशुल्क पुस्तकों के मुद्रण हेतु आंतरिक पृष्ठ के लिए 70 व 80 जीएसएम वाटर मार्क पेपर क्रय किये जाने की निविदा निकाली गई है। 
*आरोपों के मुख्य बिंदु:*
– पेपर खरीदी में बढ़ोत्तरी: पिछले साल की तुलना में 2000 मिट्रिक टन की बढ़ोत्तरी हुई है, जिससे छात्रों के बस्ते का भार में भी वृद्धि होगी।
– गुणवत्ता की अनदेखी: निविदा में कहीं भी पेपर की गुणवता के लिए वर्जिन पल्प पेपर चाहिए नहीं लिखा गया है, जिससे निम्न गुणवत्ता वाले रिसायकलिंग पेपर की खरीदी वर्जिन पेपर की दरों पर हो सकती है।
– वित्तीय भार: वर्जिन पल्प पेपर एवं पुनर्चकित कागज (रिसायकलिंग) में 10 रू. से लेकर 15 रु. प्रति किलोग्राम का अंतर होता है, जिससे भ्रष्टाचार हो सकता है। 
*वजन और वित्तीय प्रभाव:*
– 80 जीएसएम में छपाई होने पर पुस्तकों का वजन बढ़ जाएगा, जो बच्चों के कंधों पर अतिरिक्त बोझ होगा।
– 2000 मिट्रिक टन बढ़ोतरी के कारण लगभग 32 करोड़ का अतिरिक्त भार आयेगा।
*शिकायतकर्ता की मांग:*
– उपरोक्त कंडिकावार तथ्यों की जांच कर उचित कार्यवाही करने की मांग की गई है।
*संबंधित दस्तावेज:*
– निविदा की छायाप्रतिब
– संदर्भित अखबार की छायाप्रति
– वर्जिन पल्प पेपर का उपयोग और गुण की इंटरनेट की छायाप्रति
शिकायते – ’
एवं प्रबंध संचालक, छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम के पास की गई











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