5 करोड़ तेंदू पत्ता घोटाला भैरमगढ़ पुलिस की मिलीभगत से गरीब आदिवासी जनता के 60 लाख फंसे , गरीब मजदूर अपनी मजदूरी तक लिए दर दर भटकने को मजबूर …ठेकेदार सुधीर मानेक फरार

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5 करोड़ तेंदू पत्ता घोटाला भैरमगढ़ पुलिस की मिलीभगत से गरीब आदिवासी जनता के 60 लाख फंसे , गरीब मजदूर अपनी मजदूरी तक लिए दर दर भटकने को मजबूर …ठेकेदार सुधीर मानेक फरार

 

 

छत्तीसगढ़ में एक और तेंदूपत्ता घोटाला: ₹5.13 करोड़ का नुकसान, ठेकेदार और वन अधिकारियों पर गंभीर आरोप..
राजनांदगांव में हुए FIR के बावजूद राजनांदगांव के पुलिस अधीक्षक और कोतवाली थानेदार को दोषियों को गिरफ्तार करने में कोई दिलचस्पी नहीं, दोषियों पर अब तक कोई कार्यवाही नहीं !

राजनांदगांव पुलिस पर गंभीर सवाल पुलिस सुरक्षा प्राप्त कोई व्यक्ति कैसे फरार हो सकता है 

ईओडब्ल्यू में शिकायत …पढ़िए पूरी खबर

रायपुर, 27जुलाई 2025  छत्तीसगढ़ के बीजापुर और राजनांदगांव जिलों में तेंदूपत्ता व्यापार में बड़े पैमाने पर घोटाले का खुलासा हुआ है। राजनांदगांव निवासी ठेकेदार सुधीर कुमार मानेक और वन विभाग के कुछ अधिकारियों पर ₹513.21 लाख के नुकसान का आरोप है। रायपुर निवासी सामाजिक कार्यकर्ता विवेक कुमार सिंह ने आर्थिक अपराध शाखा (EOW) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को शिकायत दर्ज कर इस मामले में तत्काल जांच और कार्रवाई की मांग की है।


इस घोटाले में तत्कालीन DFO IFS अशोक पटेल और कई वरिष्ठ वन अधिकारियों की संलिप्तता उजागर होने के बाद कार्यवाही और वसूली के लिए इसकी शिकायत ACS वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ऋचा शर्मा से भी की गई है।
सूत्रों के हवाले से खबर है कि IAS ऋचा शर्मा ने कार्यवाही करने के लिए इसे अग्रेषित भी कर दिया है , अब इस प्रकरण को EOW में अशोक पटेल के खिलाफ चल रहे सुकमा तेंदूपत्ता घोटाले के प्रकरण के साथ मर्ज कर दिया जाएगा

घोटाले का विवरण

शिकायत के अनुसार, सुधीर मानेक को वर्ष 2022 में बीजापुर जिले के भैरमगढ़ क्षेत्र (लॉट क्रमांक 0064B) में 1300 मानक बोरे तेंदूपत्ता खरीदने का ठेका ₹7299 प्रति बोरा की दर से मिला था। मानेक ने वन विभाग और लघु वनोपज सहकारी संघ के कर्मचारियों से मिलीभगत कर 4997.54 मानक बोरे तेंदूपत्ता एकत्र किया, जिसमें 3521.18 बोरे वैध और 1476.36 बोरे अवैध (भैरमगढ़ अभयारण्य क्षेत्र से) थे। इस अवैध संग्रहण से सरकार को ₹364.77 लाख का नुकसान हुआ।

इसके अलावा
ठेकेदार ने ठगने में गरीब आदिवासी मजदूरों और ट्रैक्टर मालिकों को भी नहीं छोड़ा और मजदूरी तक का भुगतान नहीं किया जोन्स प्रकार है:

परिवहन बकाया  ट्रैक्टर मालिकों को ₹6 लाख बकाया।
-मजदूरी बकाया उलटाई-पलटाई के लिए ₹1.59 लाख।
– **सरकारी भुगतान**: आदिवासियों को ₹140.84 लाख का भुगतान सरकार ने किया।
**कुल नुकसान**: ₹513.21 लाख।

राजनांदगांव में हेराफेरी

ठेकेदार मानेक ने भैरमगढ़ से लाए गए 7348 बोरों में से 2669 बोरों की हेराफेरी कर राजनांदगांव के गुरुकृपा गोदाम में ₹93.34 लाख का नुकसान पहुंचाया। कोतवाली पुलिस, राजनांदगांव ने 19 जून 2025 को FIR (क्रमांक 0305) दर्ज की, जिसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(2), 316(5), और 61(2) के तहत आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, और साजिश के आरोप लगाए गए। फिर भी, मानेक और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई

पुलिस जानबूझ कर नहीं कर रही है गिरफ्तार ,

 

सुधीर मानेक की अग्रिम जमानत याचिका और हाइकोर्ट की राहत याचिका खारिज हो चुकी है ।

वन विभाग और पुलिस की संदिग्ध भूमिका

बीजापुर जांच रिपोर्ट (22.08.2023) में भैरमगढ़ के जोनल अधिकारी, नोडल अधिकारी, और प्रबंधक की लापरवाही सामने आई। अवैध संग्रहण के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। मानेक ने ₹52.39 लाख (संग्रहण, परिवहन, मजदूरी) का भुगतान नहीं किया, और भैरमगढ़ पुलिस ने IPC धारा 420 के तहत FIR दर्ज करने से इनकार कर दिया।

राजनांदगांव  वन रेंजर माखनलाल बंजारे और उप वन क्षेत्रपाल जीवनलाल देशमुख ने मानेक के साथ मिलकर हेराफेरी की। गोदाम कर्मचारियों (सुनील ठाकुर, जावेद अहमद) की भी संलिप्तता उजागर हुई।

मोहला-मानपुर मानेक ने अपने तीन कर्मचारियों पर नक्सली लेवी का झूठा आरोप लगाकर उन्हें फंसाया, जिसके कारण वे एक साल से जेल में हैं (FIR 03/2024, मदनवाड़ा थाना)। इसमें तत्कालीन ASP मयंक गुर्जर, SP यशपाल सिंह, और SDOP ताजेश्वर दीवान की भूमिका संदिग्ध है।

आदिवासियों का आक्रोश

बीजापुर के आठ गांवों (जारामोगिया, टिण्डोडी, दारमेर, आदि) के आदिवासियों को ₹44.79 लाख का संग्रहण पारिश्रमिक बकाया है। ग्रामीणों ने मार्च 2023 में राष्ट्रीय राजमार्ग पर चक्का जाम और वन मंडल कार्यालय का घेराव किया, लेकिन उनकी मांगें अनसुनी रहीं। मानेक द्वारा दिए गए चेक बाउंस होने से कई ग्रामीण और ट्रैक्टर मालिक परेशान हैं।

प्रमुख मांगें

विवेक सिंह की मांगे 

1. वसूली: ₹513.21 लाख की राशि मानेक और दोषी अधिकारियों से वसूल की जाए।

2. **जांच**: अवैध संग्रहण, हेराफेरी, और पुलिस-वन अधिकारियों की मिलीभगत की गहन जांच।

3. **गिरफ्तारी**: मानेक, दोषी वन अधिकारियों, और गोदाम कर्मचारियों की तत्काल गिरफ्तारी।

4. बकाया भुगतान आदिवासियों और ट्रैक्टर मालिकों को ₹52.39 लाख का भुगतान।

5. निर्दोषों की रिहाई झूठे आरोपों में जेल में बंद कर्मचारियों की रिहाई।

6. मुआवजा प्रभावित आदिवासियों को आर्थिक और मानसिक नुकसान के लिए मुआवजा।

7. नीतिगत सुधार  तेंदूपत्ता व्यापार में पारदर्शिता और अवैध संग्रहण रोकने के लिए सुधार।

नक्सली फंडिंग का आरोप
मानेक ने स्वीकार किया कि उसने अवैध तेंदूपत्ता संग्रहण के लिए नक्सलियों को सहयोग के लिए पैसे दिए। शिकायतकर्ता ने इसकी और इनके बैंक खातों की जांच और नक्सली फंडिंग के लिए जन सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की मांग की है

आवेदक का बयान 
विवेक कुमार सिंह ने कहा, “यह घोटाला आदिवासियों की आजीविका और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने वाला है। EOW और ACB से तत्काल कार्रवाई और न्याय की उम्मीद है।”

पुलिस और ठेकदारों की मिलीभगत 

राजनांदगांव – एसपी , मोहित गर्ग से इन सभी मामलों में जानकारी के लिए सीयूजी मोबाइल नंबर में फोन लगाया गया तो उनका गनमैंन ने कहा कि सर अभी मीटिंग में है, जब फ्री होंगे तो बात करवाएंगे लेकिन बात नहीं करवाए और जब भी कभी कोई सामाजिक संस्था या कोई भी व्यक्ति फोन लगता है तो यही जवाब आता है की सर अभी मीटिंग में है। SP मोहित गर्ग को जनता और पत्रकारों के फोन उठाने में कोई दिलचस्पी नहीं है । जबकि इनके वेतन भत्तों सुख सुविधा के सारे साधन के लिए जनता के पैसे से ही सरकार भुगतान कर रही है ।

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