रायपुर के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथिलेश चौधरी की संपत्ति की जांच की मांग, EOW में शिकायत

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रायपुर के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथिलेश चौधरी की संपत्ति की जांच की मांग, EOW में शिकायत

आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपों की निष्पक्ष जांच की उठी मांग, अस्पतालों और पैथोलॉजी लैब के स्वामित्व की भी जांच कराने का आग्रह

रायपुर। जिला रायपुर के प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. मिथिलेश चौधरी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप लगाते हुए आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) में शिकायत प्रस्तुत की गई है। शिकायत में उनकी चल-अचल संपत्ति, बैंक खातों, आय-व्यय तथा अस्पतालों और पैथोलॉजी लैब से जुड़े स्वामित्व एवं वित्तीय गतिविधियों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि डॉ. चौधरी ने अपने पद का कथित दुरुपयोग कर ज्ञात आय के स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित की है। शिकायत में राजनांदगांव जिले के कृष्णा हॉस्पिटल, पीटीएस ग्राउंड क्षेत्र, तुमड़ीबोड़ तथा मां गंगा डायग्नोस्टिक एवं रिसर्च सेंटर सहित अन्य संपत्तियों और व्यावसायिक गतिविधियों का उल्लेख किया गया है। इसमें मोहला-मानपुर क्षेत्र में अन्य नामों से अस्पताल एवं पैथोलॉजी लैब संचालित होने तथा परिवार के सदस्यों के नाम पर अचल संपत्ति खरीदे जाने की आशंका भी जताई गई है।

ठेकेदारी और व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर भी आरोप
शिकायत में डॉ. चौधरी के कार्यकाल के दौरान दोपहिया वाहनों में डीजल भरवाने तथा संविदाकर्मियों को वेंडर बनाकर शासन को कथित रूप से नुकसान पहुंचाने के आरोपों का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, इन मामलों से संबंधित शिकायतें पहले भी की गई थीं, लेकिन उन पर कार्रवाई लंबित होने की बात कही गई है।

संपत्ति और वित्तीय लेन-देन की जांच की मांग

EOW को सौंपे गए आवेदन में संबंधित अधिकारी और उनके परिवार के सदस्यों की चल-अचल संपत्ति, बैंक खातों, आय-व्यय, अस्पतालों एवं पैथोलॉजी लैब के स्वामित्व, वित्तीय लेन-देन और संपत्ति खरीदने के स्रोतों की गोपनीय एवं निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता ने आवश्यक दस्तावेजों की जांच कर आरोप प्रमाणित होने की स्थिति में नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई करने की मांग की है।

महत्वपूर्ण पक्ष: फिलहाल उपलब्ध दस्तावेज शिकायत में लगाए गए आरोपों और जांच की मांग को दर्शाता है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि, EOW की जांच की स्थिति तथा संबंधित अधिकारी का पक्ष सामने आना बाकी है। इसलिए आरोपों को प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।

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