रायपुर तहसीलदार ने लोक न्यास की भूमि के अवैध विनियम को निरस्त किया

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*रायपुर तहसीलदार ने लोक न्यास की भूमि के अवैध विनियम को निरस्त किया
रायपुर। तहसीलदार रायपुर ने ग्राम सेवा समिति (पब्लिक ट्रस्ट) की भूमि के अवैध विनियम संबंधी मामले में महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए संबंधित दस्तावेजों को निरस्त कर दिया है।

पंडरीतराई, तहसील एवं जिला रायपुर स्थित भूमि प्लाट नं. 01, शीट नं. 28 (खसरा नं. 267, 268, 269, 270, 271, 272, 273, 274, 275, 276, 281, 282, 283, 298, 299/1घ, 299/1घ, 299/1छ, 300/1 का भाग) में से 0.0220 हेक्टेयर भूमि को लेकर यह मामला सामने आया था।

ग्राम सेवा समिति (पब्लिक ट्रस्ट पंजीयन कमांक 35/53) के तत्कालीन ट्रस्टी श्री नंद कुमार दानी ने वर्ष 1971 में उक्त भूमि के विक्रय हेतु पंजीयक सार्वजनिक न्यास, रायपुर मंडल के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया था। इसके आधार पर रजिस्ट्रार ऑफ पब्लिक ट्रस्ट, रायपुर ने प्रकरण कमांक 1 बी/113 (2) वर्ष 1970-71 में विक्रय अनुमति आदेश दिनांक 06/06/1973 जारी किया था।

हालांकि अनुमति प्राप्त होने के बाद भी उक्त भूमि का कोई विक्रय नहीं किया गया। ट्रस्टी श्री नंद कुमार दानी का बाद में निधन हो चुका है और अनुमति आदेश स्वयंमेव निरस्त हो चुका है।

अजय तिवारी द्वारा प्रस्तुत आवेदन पर भी न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वे कभी ग्राम सेवा समिति के ट्रस्टी नहीं रहे। वर्तमान में पंजीयन कमांक 35 पर कोई ट्रस्टी दर्ज नहीं है।
आपत्तिकर्ता महंत रामाशीष दास ने लिखित आपत्ति में कहा कि ग्राम सेवा समिति एक पब्लिक ट्रस्ट है। छत्तीसगढ़ लोक न्यास अधिनियम की धारा 14 के तहत किसी भी लोक न्यास की अचल संपत्ति के विक्रय, विनियम, दान या लीज के लिए पंजीयक लोक न्यास की पूर्व अनुमति अनिवार्य है। आवेदिका द्वारा प्रस्तुत आवेदन पत्र एवं संलग्न दस्तावेजों के अवलोकन से यह स्पष्ट हुआ कि प्रबंधक कलेक्टर या पंजीयक सार्वजनिक न्यास की अनुमति बिना विनियम विलेख निष्पादित किया गया था।

तहसीलदार रायपुर ने राजस्व प्रकरण कमांक 202602110200115/अ-6/वर्ष 2025-2026 (पक्षकार श्रीमती बबीता अग्रवाल बनाम छत्तीसगढ़ शासन) में पारित आदेश में स्पष्ट किया कि लोक न्यास अधिनियम की धारा 14 के अनुसार पूर्व अनुमति अनिवार्य होने तथा वर्तमान में कोई ट्रस्टी न होने के कारण उक्त विनियम विलेख एवं संबंधित प्रविष्टियों को निरस्त किया जाए।

यह आदेश लोक न्यास की संपत्ति के संरक्षण तथा कानूनी प्रक्रिया के पालन की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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