*पीएम ग्राम सड़क की बदहाली पर ग्रामीणों का आक्रोश, गड्ढों में धान रोपकर जताया विरोध* *गौरघाट सहित सात गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों ने निकाली रैली, शासन-प्रशासन के खिलाफ जमकर की नारेबाजी; सड़क निर्माण की गुणवत्ता और मरम्मत को लेकर उठाए सवाल*

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*पीएम ग्राम सड़क की बदहाली पर ग्रामीणों का आक्रोश, गड्ढों में धान रोपकर जताया विरोध*

*गौरघाट सहित सात गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों ने निकाली रैली, शासन-प्रशासन के खिलाफ जमकर की नारेबाजी; सड़क निर्माण की गुणवत्ता और मरम्मत को लेकर उठाए सवाल*

*रिपोर्ट – नागेश्वर मोरे*

 

गरियाबंद/मैनपुर- गरियाबंद जिले के आदिवासी विकासखंड मैनपुर क्षेत्र में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत निर्मित सड़क की बदहाल स्थिति को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश आखिरकार सड़क पर दिखाई दिया। गौरघाट, देहारगुड़ा, खामभाठा, गिरहोला, अचानपुर, सिंहार और रामपारा सहित आसपास के गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों ने शुक्रवार को जर्जर सड़क के विरोध में रैली निकालकर शासन-प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन का अनोखा तरीका अपनाते हुए सड़क पर बने बड़े-बड़े गड्ढों और उनमें जमा पानी के बीच धान के पौधे रोपकर सांकेतिक प्रदर्शन किया। वहीं कुछ स्थानों पर बेशरम के पौधे लगाकर सड़क की बदहाली और जिम्मेदार विभाग की कथित उदासीनता पर सवाल उठाए। ग्रामीणों के इस अनोखे प्रदर्शन को देखने के लिए सड़क से गुजरने वाले लोगों की भी भीड़ जुट गई।

निर्माण के कुछ समय बाद ही उखड़ने का ग्रामीणों का आरोप

ग्रामीणों के मुताबिक प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत इस मार्ग का निर्माण वर्ष 2018 में शुरू हुआ था, जिसे लगभग तीन वर्ष में पूरा किया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण पूरा होने के कुछ समय बाद ही जगह-जगह से सड़क उखड़ने लगी और देखते ही देखते मार्ग पर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की खराब स्थिति को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत की गई। उस दौरान सड़क की मरम्मत कराने का आश्वासन भी दिया गया, लेकिन लंबे समय बाद भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।

ग्रामीणों का आरोप है कि अब विभागीय स्तर पर यह कहा जा रहा है कि सड़क निर्माण की गारंटी अवधि पांच वर्ष की होती है और वह अवधि समाप्त हो चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सड़क निर्माण के शुरुआती समय में ही सड़क खराब हो गई थी और इसकी शिकायत समय रहते कर दी गई थी, तो उस समय जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा इसकी गुणवत्ता की जांच और आवश्यक मरम्मत क्यों नहीं कराई गई।

जर्जर सड़क से हजारों ग्रामीण प्रभावित

ग्रामीणों के अनुसार यह सड़क क्षेत्र के कई गांवों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है। गौरघाट, देहारगुड़ा, खामभाठा, गिरहोला, अचानपुर, सिंहार और रामपारा सहित आसपास के गांवों के हजारों लोग प्रतिदिन इस मार्ग से आवागमन करते हैं।

सड़क पर जगह-जगह बने गहरे गड्ढों के कारण दोपहिया वाहन चालकों और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बारिश के दौरान गड्ढों में पानी भर जाने से सड़क की वास्तविक स्थिति दिखाई नहीं देती, जिससे दुर्घटना का खतरा और बढ़ जाता है।

एक दर्जन से अधिक स्कूल, बच्चों की सुरक्षा पर सवाल

ग्रामीणों ने बताया कि इस मार्ग के आसपास एक दर्जन से अधिक स्कूल संचालित हैं, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में बच्चे पढ़ने के लिए आते-जाते हैं। जर्जर सड़क और बड़े-बड़े गड्ढों के कारण स्कूली बच्चों को भी आवागमन में परेशानी होती है। ग्रामीणों ने आशंका जताई कि यदि समय रहते सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई तो किसी दिन गंभीर दुर्घटना हो सकती है।

‘विकास के दावों और धरातल की हकीकत में अंतर’

प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने कहा कि शासन-प्रशासन द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं के विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति इसके विपरीत नजर आ रही है। वर्षों से खराब पड़ी सड़क की शिकायतों के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होना ग्रामीणों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।

धान के पौधे रोपकर ग्रामीणों ने प्रशासन को यह संदेश देने का प्रयास किया कि सड़क पर बने गड्ढे अब खेत का रूप लेते जा रहे हैं। ग्रामीणों ने कहा कि उनका यह प्रदर्शन किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि क्षेत्र की मूलभूत समस्या की ओर शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए किया गया है।

जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो चक्काजाम की चेतावनी

ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही संबंधित विभाग द्वारा सड़क की स्थिति की जांच कराकर आवश्यक मरम्मत अथवा पुनर्निर्माण की कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज करेंगे। ग्रामीणों ने आवश्यकता पड़ने पर चक्काजाम और उग्र आंदोलन करने की चेतावनी भी दी है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि सड़क निर्माण की गुणवत्ता की जांच कराई जाए, वर्तमान जर्जर स्थिति के लिए जिम्मेदारी तय की जाए और मार्ग का स्थायी रूप से सुधार कराया जाए, ताकि क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके।

ये ग्रामीण रहे मौजूद

प्रदर्शन के दौरान सोहन नागेश, पवन दीवान, महेश दीवान, रंजित सिंह दीवान, संजय दीवान, लिलाधर दीवान, हुमनसिंग, पालसिंग, छबिराम, गुमान सिंह, गोवर्धन नागेश, केसर नेगी, पिलेश्वर ध्रुवा, रेमन सिंह दीवान, राजू सेन, सिलेश्वर, भारत कुलदीप, धनेश मरकाम, दुलचंद मरकाम, यशकुमार दीवान, हेमंत दीवान, मेघलाल यादव, शोभाराम मरकाम, पानसिंग दीवान, भरत दीवान, नकछेड़ा दीवान, सेवनलाल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

ग्रामीणों की मांग अब स्पष्ट है—जर्जर सड़क की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए और जल्द से जल्द सड़क का स्थायी समाधान कराया जाए।

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