भैरव देव की भव्य झांकी का आगाज, युवाओं में जोश; जानिए इसका पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व

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जम्मू कश्मीर
भक्ति, उत्साह और परंपरा का अद्भुत संगम राजौरी में एतिहासिक भैरव बाबा की भव्य झांकी 25 फरवरी से होने जा रही है। राजौरी की अनोखी होली के रूप में प्रसिद्ध इस आयोजन का युवाओं को हर साल बेसब्री से इंतजार रहता है। राजौरी जिले में होली का पर्व हर साल पूरे हर्षोल्लास और परंपरागत तरीके से मनाया जाता है। इस बार भी होली का उत्सव 25 फरवरी से भैरव देव की झांकी के साथ शुरू होगा। भैरव कमेटी की बैठक में निर्णय लिया गया कि 25, 27 फरवरी 02 और 04 मार्च को नगर के मुख्य बाजार में भैरव देव की भव्य झांकी निकाली जाएगी।

वहीं, जवाहर नगर में भी 26, 28 फरवरी, 01 और 04 मार्च को रोजाना दोपहर 1.30 बजे से शाम तक झांकी का आयोजन होगा। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाते हैं। जिन मार्गों से झांकी गुजरेगी वहां वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित रहती है।
 
ऐसे हुई थी परंपरा की शुरूआत
राजौरी में होली के अवसर पर भैरव देव की झांकी निकालने की परंपरा कई दशकों पुरानी है। मान्यता के अनुसार एक समय राजौरी में काले बुखार (एक घातक बीमारी) का प्रकोप फैला जिससे कई लोगों की मृत्यु हो गई थी। तभी एक साधु ने सुझाव दिया कि होली के अवसर पर भैरव देव की झांकी नगर में निकाली जाए, जिससे यह महामारी खत्म हो जाएगी। इसके बाद से हर वर्ष यह परंपरा निभाई जा रही है।

युवाओं की खास भागीदारी
आज भी झांकी में भैरव देव के रूप में सजे व्यक्ति के हाथों में चिमटा रहता है, जिससे मार खाने को लोग प्रसाद के रूप में स्वीकार करते हैं। मान्यता है कि इससे व्यक्ति को जीवन में कभी बुखार नहीं होता। यही कारण है कि राजौरी के युवा, जो अन्य राज्यों में पढ़ाई या नौकरी के लिए गए होते हैं, वे भी इस उत्सव में शामिल होने के लिए विशेष रूप से लौटते हैं। होली के इस खास आयोजन को लेकर नगरवासियों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है।

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