*वन विभाग की बोलेरो और ट्रक में भीषण टक्कर, फॉरेस्ट रेंजर की मौत, 8 लोग गंभीर* *NH-130 पर ध्रुवागुड़ी-बुढ़गेलटप्पा के बीच हुआ दर्दनाक हादसा*

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*वन विभाग की बोलेरो और ट्रक में भीषण टक्कर, फॉरेस्ट रेंजर की मौत, 8 लोग गंभीर*

*NH-130 पर ध्रुवागुड़ी-बुढ़गेलटप्पा के बीच हुआ दर्दनाक हादसा*

*रिपोर्ट – नागेश्वर मोरे, गरियाबंद*

गरियाबंद- छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में बुधवार शाम एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। NH-130 पर ध्रुवागुड़ी और बुढ़गेलटप्पा के बीच वन विभाग देवभोग की शासकीय बोलेरो और एक ट्रक के बीच आमने-सामने जोरदार भिड़ंत हो गई। हादसा इतना भीषण था कि वन विभाग की बोलेरो का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।
इस दर्दनाक हादसे में वन विभाग के वन परिक्षेत्र अधिकारी (रेंजर) अश्वनी दास मुरचुलिया की मौत हो गई, जबकि वाहन चालक सहित बोलेरो में सवार अन्य 8 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और आसपास के लोग तत्काल घटनास्थल पर पहुंचे।

*बोलेरो में सवार थे 9 लोग*

प्राप्त जानकारी के अनुसार, वन विभाग की शासकीय बोलेरो में कुल 9 लोग सवार थे। इसी दौरान ध्रुवागुड़ी और बुढ़गेलटप्पा के बीच बोलेरो की सामने से आ रहे ट्रक से जोरदार टक्कर हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बोलेरो का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और वाहन में सवार लोगों को गंभीर चोटें आईं।
हादसे में रेंजर अश्वनी दास मुरचुलिया को गंभीर चोटें आईं। बताया जा रहा है कि चोटों की गंभीरता के चलते उनकी मौत हो गई। वहीं वाहन चालक समेत अन्य 8 घायलों को तत्काल उपचार के लिए देवभोग अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका प्राथमिक उपचार के पश्चात उनकी स्थिति को देखते हुए सभी आठ घायलों को रायपुर रिफर किया गया।

*स्थानीय लोगों, प्रशासन और सुरक्षा बल ने संभाला मोर्चा*

हादसे की सूचना मिलते ही आसपास के ग्रामीण बड़ी संख्या में घटनास्थल पर पहुंचे। स्थानीय लोगों ने तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू किया। इसके साथ ही प्रशासनिक अमला और सुरक्षा बल के जवान भी मौके पर पहुंचे और घायलों को वाहन से बाहर निकालने में मदद की।
घायलों को तत्काल देवभोग अस्पताल ले जाया गया। हादसे के कारण कुछ समय तक सड़क पर यातायात भी प्रभावित रहा। पुलिस और संबंधित विभाग के अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे और दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी।
वहीं मृतक रेंजर अश्वनी दास मुरचुलिया के शव को पुलिस ने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। हादसे की खबर सामने आने के बाद वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ-साथ पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है।

*सड़क किनारे डाली गई मिट्टी को लेकर उठे गंभीर सवाल*

इस हादसे के बाद NH-130 पर सड़क निर्माण और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बुढ़गेलटप्पा के आसपास सड़क चौड़ीकरण या मरम्मत कार्य के दौरान सड़क के किनारे मुरुम की जगह चिकनी और पिलपिली मिट्टी डाली गई है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, सड़क किनारे मजबूत पकड़ बनाने और वाहनों को सड़क से फिसलने से रोकने के लिए मुरुम का उपयोग किया जाता है। लेकिन इसके स्थान पर चिकनी मिट्टी डालने से बारिश के मौसम में सड़क किनारे की स्थिति बेहद खतरनाक हो जाती है।
लोगों का कहना है कि बारिश या नमी के बाद यही मिट्टी कीचड़ में बदल जाती है। ऐसे में यदि कोई वाहन सड़क के किनारे पहुंचता है तो उसके टायरों की पकड़ कमजोर हो जाती है और वाहन के अनियंत्रित होने की आशंका बढ़ जाती है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, NH-130 के इस हिस्से में सड़क किनारे डाली गई चिकनी मिट्टी विशेष रूप से मोड़ वाले स्थानों पर खतरा पैदा कर रही है। तेज रफ्तार से आने वाले वाहन जब मोड़ पर मुड़ते हैं और उनका पहिया सड़क के किनारे की मिट्टी पर चला जाता है, तो वाहन का संतुलन बिगड़ सकता है।
लोगों का दावा है कि यदि सड़क किनारे मुरुम की जगह मजबूत और मानक के अनुरूप सामग्री का उपयोग किया जाता तो वाहनों को सड़क से उतरने की स्थिति में कुछ हद तक नियंत्रण बनाए रखने में मदद मिल सकती थी।
हालांकि, इस हादसे की वास्तविक वजह पुलिस और तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। सड़क किनारे डाली गई मिट्टी हादसे का कारण बनी या नहीं, यह भी जांच का विषय है।
सड़क किनारे मिट्टी डालने के बताए जा रहे दुष्परिणाम।

लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य में निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया है तो संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच कर कार्रवाई की जानी चाहिए।

*हादसे के बाद उठ रहे कई सवाल*

इस दर्दनाक हादसे के बाद स्थानीय लोगों के बीच कई सवाल उठ रहे हैं। क्या सड़क निर्माण या चौड़ीकरण के दौरान निर्धारित मानकों का पालन किया गया था? क्या सड़क किनारे डाली गई मिट्टी की गुणवत्ता की जांच की गई थी? क्या संबंधित विभाग ने बारिश के मौसम को देखते हुए सड़क की सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण किया था? क्या इस मार्ग पर पर्याप्त चेतावनी संकेतक और सुरक्षा उपाय लगाए गए हैं?
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि हादसे की निष्पक्ष जांच के साथ-साथ NH-130 पर सड़क निर्माण और मरम्मत कार्य की भी तकनीकी जांच कराई जाए। यदि सड़क किनारे डाली गई मिट्टी मानक के अनुरूप नहीं है तो उसे तत्काल हटाकर मुरुम या निर्धारित मानकों के अनुसार सामग्री डाली जाए, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों को रोका जा सके।
फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर हादसे की जांच शुरू कर दी है। दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा।

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