पीडब्ल्यूडी विभाग रायपुर में वर्षों से जमे अफसरों की लिस्ट आई सामने – भ्रष्टाचार को दे रहे बढ़ावा, क्या कहते है पीडब्ल्यूडी मंत्री … पढ़िए पूरी रिपोर्ट
रायपुर। छत्तीसगढ़ के लोक निर्माण विभाग (PWD) में वर्षों से एक ही जिले और संभाग में जमे अधिकारी अब सवालों के घेरे में हैं। ये वही अफसर हैं जिन्होंने सब इंजीनियर से लेकर एसडीओ और फिर एग्जीक्यूटिव इंजीनियर तक का सफर एक ही जिले में तय कर लिया – और अब ये लोग मलाईदार पदों पर काबिज हैं। सरकारें बदलीं, नीतियां बदलीं, लेकिन इन अफसरों की पोस्टिंग नहीं बदली।
इन पर यह कहावत एकदम सटीक बैठती है – “शैय्या भय कोतवाल, तो डर काहे का”। वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ यह अधिकारी न केवल तंत्र में जम चुके हैं, बल्कि अंदरखाने होने वाली लेन-देन की सभी ‘बारीकियों’ के जानकार भी हैं। सूत्रों की मानें तो यह अधिकारी न केवल मोटी कमाई करते हैं, बल्कि ऊपर तक ‘हिस्सा’ पहुंचाकर खुद को हर ट्रांसफर से बचा लेते हैं।
देखिए रायपुर में वर्षों से पदस्थ प्रमुख PWD अधिकारियों की सूची:
1. राजीव नशीनें – अनुकंपा नियुक्ति से सब इंजीनियर बने और फिर एसडीओ से एग्जीक्यूटिव इंजीनियर तक का सफर तय किया। वर्तमान में संभाग क्रमांक 1 रायपुर में पदस्थ हैं। खुद कहते हैं, “मुझे यहां 25 साल हो गए।”
2. अभिनव श्रीवास्तव – पहले विधानसभा में एसडीओ, अब पदोन्नति पाकर संभाग 3 रायपुर में ईई के पद पर। बताया जा रहा है कि रसूखदार हैं, जिससे हाल ही में डीके चंदेल को हटाकर इनकी पोस्टिंग की गई।
3. विशाल त्रिवेदी – विधानसभा संभाग में एसडीओ से ईई तक का सफर रायपुर में
4. जीके साहू – वर्तमान में विधानसभा संभाग में एसडीओ के पद पर रायपुर में
5. आशीष नागपूरे – सब इंजीनियर से एसडीओ बने, संभाग 1 में तैनात रायपुर में
6. प्रदीप पर्वते – संभाग 1 में सब इंजीनियर पद पर वर्षों से जमे रायपुर में
7. जय प्रकाश चौरसिया – दिव्यांग होने के बावजूद फील्ड ड्यूटी पर हैं, संभाग 3 में एसडीओ रायपुर में
8. सतीश गुजराती – सब इंजीनियर से एसडीओ, पदस्थापना: संभाग 1 रायपुर में
9. सतेंद्र सिंह चहल – विधानसभा संभाग रायपुर में एसडीओ के रूप में कार्यरत।
10. डीके चंदेल – पूर्व में नया रायपुर संभाग 3 में पदस्थ थे, अब बेमेतरा ट्रांसफर। उनके स्थान पर अभिनव श्रीवास्तव की पोस्टिंग को ‘पॉलिटिकल बैकिंग’ माना जा रहा है।
*मंत्री का जवाब: “यह प्रशासनिक प्रक्रिया है”*
PWD मंत्री अरुण साव ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा:
प्रशासनिक स्तर पर जो जैसा कार्य करता है, उसी अनुरूप उसे पोस्टिंग मिलती है। ट्रांसफर भी उसी आधार पर होते हैं। यह पूर्णतः प्रशासनिक विषय है।
हालांकि मंत्री ने सिविल सेवा आचरण नियमावली (Conduct Rules) का कोई ज़िक्र नहीं किया, जिसमें यह स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि कोई भी अधिकारी एक ही जिले में लंबी अवधि तक पदस्थ नहीं रह सकता, ताकि निष्पक्षता बनी रहे और भ्रष्टाचार की गुंजाइश न हो।
अब सवाल यह – कार्रवाई कब?
रायपुर जैसे राजधानी क्षेत्र में वर्षों से टिके यह अधिकारी अब सिस्टम के स्थायी स्तंभ बन गए हैं। ट्रांसफर नीति की धज्जियां उड़ रही हैं, लेकिन विभागीय स्तर पर कोई गंभीरता नहीं दिखती। यदि नियमों का सख्ती से पालन किया जाए, तो ऐसे अफसरों का लंबे समय तक एक ही स्थान पर जमे रहना न केवल अनुशासनहीनता है, बल्कि भ्रष्टाचार को भी बढ़ावा देता है।
क्या शासन इन अधिकारियों पर कार्रवाई करेगा, या फिर सबकुछ यूं ही चलता रहेगा?












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