कावड़ यात्रा के आगमन से क्षेत्र हुआ शिवमयझुरानदी से 18 किलोमीटर पैदल चलकर शिवधाम पर्वत पहुंचे कावड़िए, जटाशंकर महादेव का किया जलाभिषेक
डोंगरगढ़। सावन मास के पावन अवसर पर डोंगरगढ़ बोलबम जटाशंकर कावड़ यात्रा संघ के बैनर तले आयोजित भव्य कावड़ यात्रा के डोंगरगढ़ पहुंचने से पूरा क्षेत्र शिवमय हो उठा। चिचोला समीप स्थित श्रीराम मंदिर झुरानदी से पवित्र जल लेकर बड़ी संख्या में श्रद्धालु लगभग 15 किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हुए डोंगरगढ़ के प्रसिद्ध शिवधाम पर्वत स्थित श्री जटाशंकर मंदिर पहुंचे। इस दौरान पूरा मार्ग भगवान भोलेनाथ के जयकारों और ‘बोल बम’ के उद्घोष से गूंजता रहा। कावड़ियों ने जटाशंकर महादेव के शिवलिंग पर पवित्र जल अर्पित कर क्षेत्र, समाज और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
कावड़ यात्रा में पुरुषों के साथ बड़ी संख्या में महिलाओं और युवाओं ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। श्रद्धालु भगवा वस्त्र धारण कर, हाथों में कावड़ लिए नंगे पांव यात्रा करते दिखाई दिए। यात्रा के दौरान भक्ति, आस्था और सनातन संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। ग्रामीण क्षेत्रों से होते हुए कावड़ यात्रा जैसे-जैसे डोंगरगढ़ की ओर आगे बढ़ी, श्रद्धालुओं में उत्साह बढ़ता गया।
झुरानदी से विधि-विधान से भरा जल
*कावड़ यात्रा का शुभारंभ चिचोला समीप झुरानदी स्थित श्रीराम मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना के साथ हुआ।*
श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा कर पवित्र जल कावड़ में भरा और भगवान शिव के जयकारों के साथ डोंगरगढ़ के लिए प्रस्थान किया। लगभग 18 किलोमीटर की दूरी पैदल तय करने के बाद कावड़िए डोंगरगढ़ पहुंचे। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं का जगह-जगह स्वागत किया गया।
*डोंगरगढ़ पहुंचने पर शक्ति वाहिनी की बहनों द्वारा कावड़ यात्रियों का पुष्पवर्षा कर आत्मीय स्वागत किया गया।* स्वागत से श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया। पूरे वातावरण में हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारे गूंजते रहे।
*कावड़ यात्रा सनातन संस्कृति और आस्था का प्रतीक : वेदराम ताम्रकार*
वरिष्ठ भाजपा नेता एवं कावड़िया वेदराम ताम्रकार ने कहा कि कावड़ यात्रा हमारी सनातन संस्कृति, धार्मिक आस्था और भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा का प्रतीक है।
ऐसे धार्मिक आयोजन नई पीढ़ी विशेषकर युवाओं को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि कावड़ यात्रा जैसे आयोजन समाज में आपसी भाईचारा, एकता और धार्मिक भावना को मजबूत करते हैं।
कावड़िया अशोक वर्मा ने कहा कि 15 किलोमीटर की पैदल यात्रा पूरी कर शिवधाम पर्वत तक पहुंचना श्रद्धालुओं के लिए आस्था और तपस्या का विषय है।
श्रीमती किरण साहू उपाध्यक्ष जिला पंचायत राजनादगांव ने कह पैदल चलने के बाद पर्वत पर चढ़कर भगवान जटाशंकर महादेव का जलाभिषेक करना आसान नहीं है, लेकिन भगवान शिव के प्रति श्रद्धा के सामने कठिनाइयां छोटी हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि मंदिर पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक करने के बाद मन को जो शांति और संतोष प्राप्त होता है, वह शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता।
*जटाशंकर मंदिर ट्रस्ट ने किया कावड़ियों का स्वागत*
श्री जटाशंकर मंदिर ट्रस्ट समिति के अध्यक्ष सोन कुमार सिन्हा एवं अन्य पदाधिकारियों ने कावड़ यात्रा के डोंगरगढ़ पहुंचने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि पूर्व वर्षों की तरह इस वर्ष भी कावड़ियों का उत्साहपूर्वक स्वागत किया गया। उन्होंने कहा कि भगवान जटाशंकर महादेव के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था लगातार मजबूत हो रही है और सावन के दौरान दूर-दूर से श्रद्धालु यहां पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं।
मंदिर ट्रस्ट समिति के कार्यकारी अध्यक्ष जितेंद्र ठाकुर ,विशाल सुराणा, प्रेमा ए ने कहा कि कावड़ यात्रा में महिलाओं और युवाओं की बढ़-चढ़कर भागीदारी विशेष रूप से सराहनीय रही। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक एकता और सनातन परंपराओं को मजबूत करने का संदेश देते हैं।
*जलाभिषेक के साथ हुआ यात्रा का समापन*
कावड़ यात्रा का अंतिम पड़ाव डोंगरगढ़ के प्रसिद्ध श्री जटाशंकर मंदिर स्थित शिवधाम पर्वत रहा। मंदिर पहुंचने के बाद सभी कावड़ियों ने बारी-बारी से भगवान जटाशंकर महादेव के शिवलिंग पर झुरानदी से लाए गए पवित्र जल से जलाभिषेक किया। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव से क्षेत्र में सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना के साथ भजन-कीर्तन का आयोजन भी हुआ, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। कावड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था को लेकर डोंगरगढ़ पुलिस, चिचोला पुलिस प्रशासन तथा मंदिर समिति द्वारा आवश्यक व्यवस्थाएं की गई थीं। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी के बीच शांतिपूर्ण एवं धार्मिक वातावरण में कावड़ यात्रा का समापन हुआ।
सावन के पवित्र महीने में आयोजित इस कावड़ यात्रा ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि आस्था, भक्ति और सनातन संस्कृति लोगों को एक सूत्र में बांधने की शक्ति रखती है। झुरानदी से जटाशंकर महादेव तक की यह यात्रा श्रद्धालुओं के लिए केवल 15 किलोमीटर का सफर नहीं, बल्कि भक्ति, विश्वास और भगवान शिव के प्रति समर्पण की आध्यात्मिक यात्रा बन गई।












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