गरियाबंद-झोपड़ी में चल रही आंगनवाड़ी,खतरे में बच्चों का भविष्य,ग्रामीणों की पक्के भवन की मांग
गरियाबंद – सरकार बच्चों के बेहतर पोषण और शुरुआती शिक्षा के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा करती है, लेकिन छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से जो तस्वीर सामने आई है, वह इन दावों की हकीकत बयां करती है।
मैनपुर ब्लॉक के सरगीगुड़ा गांव में आज तक आंगनवाड़ी का पक्का भवन नहीं बन पाया। मजबूरी में नौनिहाल कभी खेत में तो कभी टिकरा पर बने अस्थायी शेड के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं।
ये तस्वीरें गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड के सरगीगुड़ा गांव की हैं। यहां महिला एवं बाल विकास विभाग की अनदेखी साफ दिखाई देती है। वर्षों बीत जाने के बाद भी आंगनवाड़ी केंद्र का पक्का भवन नहीं बन पाया है।
ऐसे में बच्चों की कक्षाएं खेत और टिकरा पर बांस के खंभों व हरी जालीनुमा नेट से बने अस्थायी शेड के नीचे लगाई जा रही हैं। कड़कड़ाती धूप हो या बारिश का मौसम… मासूम बच्चे खुले माहौल में जमीन पर दरी बिछाकर बैठने को मजबूर हैं। यहां न तो पक्की छत है और न ही पर्याप्त सुरक्षा। खुले क्षेत्र में सांप-बिच्छू जैसे जहरीले जीवों का खतरा हर समय बना रहता है।
वहीं बदलते मौसम के कारण बच्चों के बीमार पड़ने की आशंका भी लगातार बनी रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार संबंधित विभाग और प्रशासन को पक्के भवन की मांग से अवगत कराया गया, लेकिन आज तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता भी सीमित संसाधनों के बीच बच्चों को पढ़ाने और पोषण सेवाएं देने के लिए मजबूर हैं।
-आंगनवाड़ी बच्चों के सर्वांगीण विकास की पहली कड़ी मानी जाती है। लेकिन जब बुनियादी सुविधाएं ही उपलब्ध नहीं हों, तो बच्चों के सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भविष्य पर सवाल उठना लाजिमी है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार विभाग इस ओर कब तक ध्यान देता है।
गरियाबंद से जोहरमल प्रधान की रिपोर्ट
पक्के भवन के बिना चल रही आंगनवाड़ी
खेत और टिकरा पर पढ़ने को मजबूर बच्चे
बांस और नेट के नीचे लग रही कक्षाएं
सांप-बिच्छू और बीमारियों का खतरा












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