*प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज के सामाजिक एकीकरण की कारवां अब नहीं रुकेगी – एल एल कोशले*
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*पत्थलगांव, जशपुर*
प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज द्वारा चलाए जा रहे पांच दिवसीय सामाजिक एकीकरण एवं समन्वय अभियान के तीसरे दिन प्रदेश अध्यक्ष एल एल कोशले के नेतृत्व में प्रदेश महासचिव मोहन बंजारे, प्रदेश सहसचिव दिनेश बंजारे और युवा प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप श्रृंगी पत्थलगांव पहुंचे।
पत्थलगांव पहुंचने पर समाज के पदाधिकारियों और प्रमुखों द्वारा ऐतिहासिक स्वागत किया गया। बाइक और कार रैली निकालकर शहर भ्रमण करते हुए सभी सतनाम भवन पहुंचे, जहां फूलमाला, आतिशबाजी और पंथी नृत्य के साथ स्वागत किया गया। जोड़ा जैतखाम में प्रदेश अध्यक्ष, पदाधिकारियों और समाज प्रमुखों की उपस्थिति में संध्या आरती की गई।
*जिला अध्यक्ष सत्या मौर्य का उद्बोधन*
जशपुर जिला अध्यक्ष ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि जशपुर जिले में सतनामी समाज का एक ही संगठन है – प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज। इसके बैनर तले गुरु घासीदास जयंती, शोभायात्रा, डॉ. बाबा साहेब अम्बेडकर जयंती सहित सामाजिक रीति-नीति में सुधार के लिए निरंतर रचनात्मक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
*मुख्य अतिथि का संदेश*
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रदेश अध्यक्ष एल एल कोशले ने कहा – “प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज द्वारा चलाए जा रहे सामाजिक एकीकरण एवं समन्वय की कारवां अब नहीं रुकेगी। हम बस्तर से लेकर सरगुजा-जशपुर तक हर ब्लॉक और गांव में रचनात्मक कार्य कर रहे हैं।”
उन्होंने बताया कि कोरबा, कटघोरा, चिरमिरी, बैकुंठपुर, सूरजपुर, अंबिकापुर, कापू, पत्थलगांव, जशपुर, रायगढ़ जिलों में समाज हित में बेहतर कार्य हो रहा है। संगठन का उद्देश्य शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वरोजगार को बढ़ावा देकर सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिवर्तन लाना है।
प्रदेश महासचिव मोहन बंजारे ने प्रदेश स्तरीय सतनामी सम्मेलन में पारित 15 बिंदुओं के प्रस्ताव को गांव-गांव में लागू करने का आह्वान किया।
प्रदेश सहसचिव दिनेश बंजारे ने संगठन की स्थापना, विभिन्न प्रकोष्ठों के गठन और उनके उद्देश्यों पर विस्तार से जानकारी दी और सभी से प्रगतिशील से जुड़कर समाज को संगठित करने का निवेदन किया।
युवा प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप श्रृंगी ने युवाओं से संगठन को मजबूत करने में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने का आह्वान किया।
इस अवसर पर जशपुर जिला के पदाधिकारियों सहित 28 गांवों के समाज प्रमुख बड़ी संख्या में उपस्थित थे।













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