नई शिक्षा नीति के सफल क्रियान्वयन में शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण : डॉ. अनिल द्विवेदी
रायपुर। बालाजी विद्या मंदिर में गुरुवार को शिक्षकों के लिए पुनर्विन्यास (रीओरिएंटेशन) सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में नई शिक्षा नीति के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई तथा शिक्षकों को बदलते शैक्षणिक परिवेश के अनुरूप स्वयं को तैयार करने का संदेश दिया गया।
मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए पत्रकार एवं शिक्षाविद् डॉ. अनिल द्विवेदी ने कहा कि “विश्व गुरु बनने का रास्ता केवल स्मार्टफोन और भाषणों से नहीं, बल्कि स्कूल की मजबूत नींव से होकर जाता है।” उन्होंने कहा कि शिक्षक राष्ट्र निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं और नई शिक्षा नीति के उद्देश्यों को धरातल पर उतारने में उनकी भूमिका निर्णायक है।
डॉ. द्विवेदी ने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे अपने मन को स्क्रीन, चित्त को हार्डडिस्क, बुद्धि को निर्णयकर्ता तथा आत्म-नियंत्रण को जीवन का आधार बनाकर आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि निरंतर सीखने और स्वयं को अद्यतन रखने से ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा संभव हो सकेगी।
कार्यक्रम में विद्यालय समिति के अध्यक्ष स्वामी जी, मोटिवेशनल स्पीकर डॉ. मुकेश शाह तथा सतीश श्रीवास्तव विशेष रूप से उपस्थित रहे। अतिथियों ने शिक्षकों को नई शिक्षा नीति की भावना के अनुरूप विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए कार्य करने का संदेश दिया।
सत्र के दौरान शिक्षकों ने भी अपने अनुभव साझा किए और शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए विभिन्न सुझाव प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का समापन आभार प्रदर्शन के साथ हुआ।












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