समग्र शिक्षा के तहत व्यावसायिक प्रशिक्षकों की भर्ती में गड़बड़ी के आरोप, लर्नेट स्किल्स लिमिटेड पर गंभीर सवाल , मंत्री ने जारी किया एफ.आई .आर. के आदेश…

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समग्र शिक्षा के तहत व्यावसायिक प्रशिक्षकों की भर्ती में गड़बड़ी के आरोप, लर्नेट स्किल्स लिमिटेड पर गंभीर सवाल , मंत्री ने जारी किया एफ.आई .आर. के आदेश…रायपुर,

राज्य परियोजना कार्यालय (समग्र शिक्षा) के अंतर्गत संचालित व्यावसायिक शिक्षा कार्यक्रम में प्रशिक्षकों की भर्ती को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। *लर्नेट स्किल्स लिमिटेड* पर भर्ती प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी, अपात्र अभ्यर्थियों की नियुक्ति, वित्तीय अनियमितताओं तथा दस्तावेजों में कथित हेरफेर के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस संबंध में एक विस्तृत शिकायत मीडिया को प्रेषित की गई है, जिसमें कंपनी के कार्यप्रणाली पर कई प्रश्न खड़े किए गए हैं।

## कंपनी की पृष्ठभूमि पर उठे सवाल

शिकायत में उल्लेख है कि उक्त कंपनी पूर्व में *IL&FS* समूह से संबंधित रही है। वर्ष 2018 में **NCLT (राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण)** द्वारा IL&FS को दिवालिया घोषित किया गया था। शिकायतकर्ता का कहना है कि कंपनी के पूर्व इतिहास को देखते हुए इसकी कार्यप्रणाली की गहन जांच आवश्यक है। हालांकि, इस संबंध में कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है

## भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितता

राज्य परियोजना कार्यालय द्वारा 11 जुलाई 2025 को जारी आदेश में व्यावसायिक प्रशिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश निर्धारित किए गए थे। चयन प्रक्रिया को **PSSCIVE, भोपाल** द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित किया जाना था

शिकायत के अनुसार, विज्ञापन में जहां “Post Graduation in Textile & Clothing” जैसी उच्च शैक्षणिक योग्यता अपेक्षित थी, वहीं वास्तविक चयन प्रक्रिया में डिप्लोमा अथवा स्नातक स्तर की योग्यता रखने वाले अभ्यर्थियों को नियुक्त कर दिया गया। आरोप है कि कुल **62 पदों पर अपात्र अभ्यर्थियों की भर्ती** की गई।

शिकायतकर्ता का कहना है कि यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि इससे छात्रों की शिक्षा की गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

## चयन सूची और आदेशों की अवहेलना

राज्य परियोजना कार्यालय द्वारा निर्धारित समय-सीमा के अनुसार 30 जुलाई 2025 तक चयन प्रक्रिया पूर्ण कर सूची प्रस्तुत करना अनिवार्य था। आरोप है कि कंपनी ने समय-सीमा का पालन नहीं किया तथा चयन सूची को समय पर कार्यालय में प्रस्तुत नहीं किया।

इसके अतिरिक्त यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ अभ्यर्थियों को वैध दस्तावेजों के सत्यापन के बिना ही ज्वाइनिंग लेटर जारी कर दिए गए। स्टेट कोऑर्डिनेटर स्तर पर दस्तावेजों में कथित संशोधन और फेरबदल की भी शिकायत की गई है।

## वित्तीय अनियमितता के आरोप

शिकायत में वर्ष 2023–24 के दौरान औद्योगिक भ्रमण एवं अतिथि व्याख्यान के नाम पर प्रस्तुत बिलों में गड़बड़ी का आरोप लगाया गया है। करीब **50 लाख रुपये** के व्यय को संदिग्ध बताया गया है और इसकी स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।

इसके अलावा विद्यालयों के आवंटन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। प्रारंभ में 206 विद्यालयों के संचालन का उल्लेख था, जिसे बाद में बढ़ाकर 300 विद्यालयों तक कर दिया गया। शिकायतकर्ता ने इस विस्तार की प्रक्रिया की पारदर्शिता और औचित्य पर प्रश्न उठाए हैं।

## आरटीआई में मिली जानकारी से बढ़ा विवाद

शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त दस्तावेजों में कई विसंगतियां सामने आई हैं। भर्ती प्रक्रिया, दस्तावेजी सत्यापन तथा वित्तीय खर्च से संबंधित जानकारी में कथित अंतर पाया गया है।

## क्या कहते हैं शिकायतकर्ता?

शिकायतकर्ता ने मांग की है कि:

* पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए
* कंपनी का अनुबंध तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाए
* कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जाए
* आवश्यक होने पर एफआईआर दर्ज की जाए

उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो यह मामला शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करेगा।

## प्रशासन और कंपनी की प्रतिक्रिया प्रतीक्षित

समाचार लिखे जाने तक राज्य परियोजना कार्यालय या *लर्नेट स्किल्स लिमिटेड* की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई है। यदि संबंधित पक्ष अपना पक्ष प्रस्तुत करते हैं, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

## शिक्षा व्यवस्था पर प्रभाव की आशंका

विशेषज्ञों का मानना है कि व्यावसायिक शिक्षा कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को कौशल आधारित प्रशिक्षण देकर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। यदि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और योग्यता से समझौता किया गया है, तो इसका सीधा असर छात्रों के भविष्य पर पड़ सकता है।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इन आरोपों को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या स्वतंत्र जांच के आदेश जारी किए जाते हैं।

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