कन्या महाविद्यालय में बवाल —प्रभारी प्राचार्य के खिलाफ स्टाफ में रोष,

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कन्या महाविद्यालय में बवाल —प्रभारी प्राचार्य के खिलाफ स्टाफ में रोष, 

क्षेत्रीय अपर संचालक,उच्च शिक्षा विभाग के पास एकजुट होकर प्राध्यापकों ने सौंपा लिखित शिकायत

प्रभारी प्राचार्य पर चरित्र हनन, अभद्र टिप्पणी और ‘फेल’ करने की धमकी के गंभीर आरोप

बेमेतरा।- शहर के शासकीय कन्या महाविद्यालय में हालात तनावपूर्ण हो गए हैं ओर जिले के किसी शिक्षण संस्थान में पहली मर्तबा जहां प्रभारी प्राचार्य डॉ. विनीता गौतम के खिलाफ कॉलेज की महिला प्राध्यापकों, कर्मचारियों और दर्जनों छात्राओं ने संयुक्त रूप से मोर्चा खोलते हुए क्षेत्रीय अपर संचालक, उच्च शिक्षा विभाग दुर्ग ,कलेक्टर व स्थानीय विधायक को विस्तृत लिखित शिकायत सौंप दी है।

शिकायत में मानसिक उत्पीड़न, अभद्र टिप्पणियां, चरित्र हनन, धमकी और शैक्षणिक माहौल बिगाड़ने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत पत्र में जिन प्राध्यापकों के नाम उल्लेखित हैं, उनमें स्वेता पावले (सहायक प्राध्यापक ) डॉ मेघा तिवारी (अतिथि शिक्षक ) सुनीता राउत (सहायक प्राध्यापक), सरस्वती चौहान (सहायक प्राध्यापक), स्वाति चंद्राकर (सहायक प्राध्यापक), विवेक कुमार देवांगन (सहायक प्राध्यापक) एवं टिकेंद्र वर्मा (सहायक प्राध्यापक) प्रकाश दास एवं अन्य कार्यालइन स्टाफ शामिल हैं। सभी ने संयुक्त हस्ताक्षर कर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

गौरतलब है कि नियमित प्राचार्य क़े स्थानंतरण हो गया है ओर कन्या महाविद्यालय बेमेतरा में नियमित प्राचार्य ने ज्वाइन नही करने क़े चलते वर्तमान में पद रिक्त रहने पर डॉ विनीता गौतम जो स्वयं सहायक प्राध्यापक है जिसे उच्च शिक्षा आयुक्त कार्यालय द्वारा प्राचार्य का अस्थाई प्रभार सौपा गया है ।

=महिला शिक्षकों का आरोप—‘सम्मान से समझौता नहीं’

शिकायत के अनुसार प्रभारी प्राचार्य द्वारा महिला शिक्षकों के शारीरिक बनावट पर अमर्यादित टिप्पणियां की जाती हैं। इतना ही नहीं, महिला प्राध्यापकों का नाम अन्य पुरुष प्राध्यापकों के साथ जोड़कर उनके चरित्र पर टिप्पणी की जाती है, जिससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा और पेशेवर गरिमा को ठेस पहुंच रही है। शिक्षकों का कहना है कि इस तरह का व्यवहार कार्यस्थल को असुरक्षित और अपमानजनक बना रहा है।

=‘महिला टॉयलेट तक पर रोक’ का आरोप

महिला कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया है कि उन्हें स्वच्छ महिला टॉयलेट उपयोग करने से रोका गया। इसे उन्होंने बुनियादी अधिकारों का हनन बताया है। कर्मचारियों का कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में सम्मानपूर्वक कार्य करना कठिन हो गया है।

=जबरन शिकायत और दबाव की राजनीति?

शिकायत में यह भी उल्लेख है कि कुछ शिक्षकों पर दबाव बनाकर मनमाफिक शिकायत पत्र लिखवाने की कोशिश की गई। विरोध करने पर प्रताड़ना और अपमान की धमकी दी जाती है। असहमति जताने वालों को निशाना बनाए जाने का भी आरोप लगाया गया है।

=छात्राओं ने भी खोला मोर्चा—‘फेल करने की धमकी’

मामले ने तब तूल पकड़ा जब कॉलेज की दर्जनों छात्राओं ने हस्ताक्षरयुक्त आवेदन देकर शिक्षकों का समर्थन किया। छात्राओं का आरोप है कि उन्हें आंतरिक मूल्यांकन में कम अंक देने और फेल करने की धमकी दी जाती है। उन्होंने कहा कि भय और दबाव के माहौल में पढ़ाई करना मुश्किल हो गया है।

=शैक्षणिक वातावरण पर सवाल

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि लगातार अपमानजनक व्यवहार और धमकियों से कॉलेज का शैक्षणिक वातावरण प्रभावित हो रहा है। मानसिक तनाव के बीच पढ़ाई और अध्यापन दोनों बाधित हो रहे हैं। जांच और कार्रवाई की मांग
शिक्षकों और छात्राओं ने उच्च शिक्षा विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर कठोर कार्रवाई की मांग की है, ताकि महाविद्यालय में सम्मानजनक और सुरक्षित वातावरण बहाल हो सके। यह मामला अब जिले के शैक्षणिक हलकों में चर्चा का विषय बन चुका है। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए उच्च शिक्षा विभाग की अगली कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

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