ग्राम साल्हे भाट में गोंड समाज के पहल से क्रिश्चन धर्म को छोड़ मूल गोंडी धर्म संस्कृति में वापसी :-

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ग्राम साल्हे भाट में गोंड समाज के पहल से क्रिश्चन धर्म को छोड़ मूल गोंडी धर्म संस्कृति में वापसी :-

कांकेर, सरोनाआज ग्राम साल्हे भाट के गोंडवाना समाज के पहल से क्रिश्चन धर्म अपनाए परिवार ने क्रिश्चन धर्म को छोड़ अपने गोंडी धर्म संस्कृति को अपनाया , आदिवासी किसी धर्म संस्कृति का नहीं होता है आदिवासी न हिंदू है , न मुस्लिम न सिख न क्रिश्चन , आदि आदिवासी कि अलग पहचान होती है , आदिवासी कोई धर्म नहीं है देश का सुप्रीम कोर्ट भी 2011 में फैसला दिया है।

दिया आदिवासी हिन्दू नहीं है , आदिवासी का संस्कृति अलग है आदिवासी इस देश के मूलनिवासी है जो प्रकृति को मानने और पूजने वाला वाला समाज है , ग्राम साल्हे भाट में गोंड समाज द्वारा पीला चावल और पिला गमछा भेट कर स्वागत किया साथ में प्रकृति को भगवान मानते हुए अपने माटी धरती के सेवा अर्जी कर समाज में खुशी से मिलाया

इस अवसर पर ग्राम पटेल राधेश्याम भास्कर, ग्राम उपाध्याय नंदलाल कोर्राम , पूर्व सरपंच तुलसी नेताम, केजई कुंजाम, गोंडवाना समाज अध्यक्ष भाऊ राम कुमेटी , जलसिंह शोरी,पूर्व ग्राम सभा अध्यक्ष भीखम मंडावी, पुनीत कुंजाम एवं समस्त ग्रामवासियों उपस्थित थे

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