छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव: स्वामी विवेकानंद के जीवन और छत्तीसगढ़ प्रवास पर व्याख्यानमाला आयोजित
रायपुर के शासकीय नवीन महाविद्यालय माना कैंप में छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव के तहत स्वामी विवेकानंद के जीवन और उनके छत्तीसगढ़ प्रवास पर एक महत्वपूर्ण व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में प्रसिद्ध इतिहासकार और पुरातत्ववेत्ता आचार्य रमेंद्र नाथ मिश्र ने मुख्य वक्ता के रूप में विद्यार्थियों को संबोधित किया।
*स्वामी विवेकानंद के रायपुर प्रवास की जानकारी*
आचार्य रमेंद्र नाथ मिश्र ने बताया कि स्वामी विवेकानंद रायपुर में 2 वर्षों तक रहे और इस दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण स्थानों पर भ्रमण किया। उन्होंने बताया कि विवेकानंद सिटी कोतवाली चौक, गांधी मैदान के पीछे और माधव राव सप्रे स्कूल के मध्य में हरिनाथ डे के घर रुके थे और स्नान के लिए बूढ़ा तालाब जाया करते थे।
*बूढ़ा तालाब में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा*

आचार्य मिश्र ने बताया कि बूढ़ा तालाब में स्वामी विवेकानंद की विशालकाय प्रतिमा स्थापित की गई है, जो उनके प्रवास की याद दिलाती है। उन्होंने यह भी बताया कि विवेकानंद जहां रुके थे, आज भी वो स्थान उसी तरह सुरक्षित है।
*विवेकानंद के विचार और गुरु-शिष्य परंपरा*
आचार्य मिश्र ने विद्यार्थियों को विवेकानंद के विचारों से प्रेरित किया और बौद्धिक ईमानदारी रखने की सीख दी। उन्होंने आचार्य रामकृष्ण परमहंस और विवेकानंद के गुरु-शिष्य परंपरा पर भी प्रकाश डाला।
*विकसित छत्तीसगढ़ 2047*
महाविद्यालय प्रमुख प्राचार्य डॉ कीर्ति तिवारी ने विकसित छत्तीसगढ़ 2047 के पहलुओं पर चर्चा की और विद्यार्थियों को अपनी ऊर्जा को सकारात्मक कार्यों पर केंद्रित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आज हम रजत महोत्सव मना रहे हैं तो अगले 25 वर्षों की जिम्मेदारी विद्यार्थियों की बनती है।
*कार्यक्रम की मुख्य बातें*
– स्वामी विवेकानंद के रायपुर प्रवास की जानकारी
– बूढ़ा तालाब में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा
– विवेकानंद के विचार और गुरु-शिष्य परंपरा
– विकसित छत्तीसगढ़ 2047
*कार्यक्रम में उपस्थित अतिथि*
– महाविद्यालय के इतिहास विभाग के प्रमुख डॉ चौलेश्वर चंद्राकर
– सांसद प्रतिनिधि निमाई विश्वास
– डॉ स्वामि शर्मा
– सीमा कुजुर
– नर्गिस एनेश्वरी
– समस्त विद्यार्थी माना कैंप
इस व्याख्यानमाला का उद्देश्य स्वामी विवेकानंद के जीवन और उनके छत्तीसगढ़ प्रवास के बारे में विद्यार्थियों को जानकारी प्रदान करना और उन्हें उनके विचारों से प्रेरित करना था।











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