पावस प्रसंग के दूसरे दिन आशना ने दी राग मिया मल्हार पर कथक की प्रस्तुति

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पावस प्रसंग के दूसरे दिन आशना ने दी राग मिया मल्हार पर कथक की प्रस्तुति

संस्कृति विभाग छत्तीसगढ़ शासन द्वारा आयोजित शास्त्रीय नृत्य संगीत एवं गायन के उत्सव पावस प्रसंग के दूसरे दिन रायपुर की प्रख्यात कथक नृत्यांगना आशना दिल्लीवार की शानदार प्रस्तुति से मौजूद दर्शकों भावविभोर कर दिया। उन्होंने नृत्य की शुरुआत शिव वंदना से की। तत्पश्चात राग मिया मल्हार पर आधारित रचना की प्रस्तुति दी जिसमे नायिका द्वारा कभी बारिश में खुश होकर अठखेलिया करना तो कभी बादलो की गड़गड़ाहट से डर जाना एवं अपने प्रिय से बिछड़ने का दूख का वर्णन था। अंत में लखनऊ घराने का तराना और त्रिताल में तत्कार का प्रदर्शन कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

उनके नृत्य की भाव भंगिमाएँ, लय ताल की सटीकता और भावपूर्ण अभिव्यक्ति ने कार्यक्रम में उपस्थित हर किसी के मन को छू लिया। दर्शकों ने इस सांस्कृतिक और आध्यात्मिक प्रदर्शन का भरपूर आनंद लिया।


15 वर्षीय आशना कथक नृत्य विधा में इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ से विद है। उन्होंने छह वर्ष की अल्प आयु से ही रायपुर में अपने गुरु डॉ राजश्री नामदेव एवं श्रीमती अंजनी ठाकुर से कथक का प्रशिक्षण लेना प्रारंभ कर दिया था। बता दे कि आशना देश-विदेश में लगभग 85 से भी ज्यादा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने कत्थक की प्रस्तुति दे चुकी है। आशना को अंतर्राष्ट्रीय मेंधकर सम्मान, नेशनल विभूति सम्मान, नृत्योदय सम्मान, चक्रप्रिया नृत्यश्री सम्मान, नृत्य सागर सगम सम्मान, अंतर्राष्ट्रीय नृत्य विभूष आदि सम्मानों से सम्मानित किया जा चूका है।

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