रायपुर। राजधानी रायपुर में पूर्ववर्ती सरकार में हुए 3200 करोड़ के शराब घोटाले का हाईप्रोफ़ाइल मामला इन दिनों प्रदेश सहित पुरे देश के राजनैतिक गलियारों में हलचल मचा रखी है ,लेकिन भाजपा सरकार में भी एक बार फिर इसी तरह के बड़े घोटाला होने का आरोप लगाया जा रहा है। रायपुर कलेक्टर और आबकारी सचिव को सोशल मीडिया (whatsapp) के जरिये शिकायत की गई है उसकी शिकायत को शिकायतकर्त्ता के द्वारा हमारे संवादाता को भी भेजा गया है। इस शिकायत में रायपुर जिले के आबकारी विभाग पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं, जिसमें अधिकारियों, कांग्रेसी नेता और अवैध वसूली का एक बड़ा गिरोह शामिल होने का दावा किया गया है। इन आरोपों ने जिले में हड़कंप मचा दिया है और कलेक्टर से तत्काल प्रभाव से उड़नदस्ता (flying squad) द्वारा जांच कराने की मांग की गई है।
प्राप्त जानकारी और विश्वशनीय सूत्रों के अनुसार, मुख्य आरोप इस प्रकार हैं।

लाइसेंसी अहाता संचालकों से अवैध वसूली और अवैध चखना केंद्रों को बढ़ावा: आरोप है कि रायपुर जिले में लाखों रुपये की लाइसेंस फीस देकर वैध अहाता (शराब पीने की जगह) चलाने वाले संचालकों को बेवजह परेशान किया जा रहा है। इसके विपरीत, आबकारी उपायुक्त, अपने खास इंस्पेक्टर दीनदयाल पटेल के माध्यम से, अवैध चखना केंद्रों से लाखों की वसूली करवा रहे हैं। इससे वैध कारोबारियों को भारी नुकसान हो रहा है, जबकि अवैध गतिविधियां फल-फूल रही हैं।
प्रति पेटी अवैध वसूली: खरोरा और अभनपुर के लालपुर स्थित शराब दुकानों से प्रति पेटी शराब पर 250 रुपये की अवैध वसूली का आरोप है। इसमें से 100 रुपये जिला आबकारी अधिकारी राजेश शर्मा को जाते हैं, जबकि शेष 150 रुपये निचले स्तर के कर्मचारियों में बांटे जाते हैं।
कांग्रेस नेता दलजीत चावला की संलिप्तता: हाल ही में पार्षद चुनाव हारे कांग्रेस नेता दलजीत चावला पर आरोप है कि वह हर शराब दुकान पर अपने अवैध अहाता संचालकों से वसूली कर आबकारी विभाग तक पैसे पहुंचा रहे हैं। पूर्व में निलंबित रहीं एक आबकारी अधिकारी के साथ मिलकर, दलजीत चावला ने कथित तौर पर शराब दुकानों को अपने परिचितों की जमीनों पर स्थानांतरित करवाया है। साथ ही, वे अहाता संचालकों से अनुचित किराए की मांग करते हैं और मांग पूरी न होने पर लाइसेंस रद्द कराने की धमकी देते हैं।
वन डे लाइसेंस में ‘वीआईपी खर्च’ के नाम पर वसूली: सिंगल डे लाइसेंस के हर आवेदन पर 55 हजार रुपये की मांग की जा रही है, जिसे ‘वीआईपी खर्च’ का नाम दिया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, यह राशि संभवतः पी.एल. साहू तक पहुंचती है।
प्रभारी उपायुक्त, जो जिला आबकारी अधिकारी के मूल पद पर हैं, पर भी अवैध अहाता के नाम पर लाखों की वसूली कराने का आरोप है। शिकायत में कलेक्टर से तत्काल इस मामले की जांच उड़नदस्ता से कराने की अपील की गई है, क्योंकि इन आरोपों का सीधा असर प्रशासन की छवि पर पड़ सकता है।
शिकायतकर्ताओं ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि वर्तमान प्रशासन इन आरोपों पर कार्रवाई नहीं करता है, तो यही कांग्रेसी नेता दलजीत चावला अगली सरकार बनने पर इन्हीं मामलों में एसीबी (Anti Corruption Bureau) या ईओडब्ल्यू (Economic Offences Wing) से जांच करा सकते हैं, जिससे कई अधिकारी और नेता मुश्किल में पड़ सकते हैं।
इन गंभीर आरोपों पर जिला प्रशासन और आबकारी विभाग के उच्च अधिकारियों की प्रतिक्रिया अभी तक सामने नहीं आई है। हालांकि, इन दावों की सत्यता की जांच आवश्यक है ताकि पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके।










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