मासूम की जिंदगी में उम्मीद बनकर पहुंचे राहुल हरितवाल*

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*मासूम की जिंदगी में उम्मीद बनकर पहुंचे राहुल हरितवाल 

*प्रताड़ना के मामले में मां और सौतेला पिता गिरफ्तार
घायल बच्चे को तत्काल*

*अस्पताल पहुंचाकर बचाव की पहल, बाल संरक्षण विभाग की निगरानी में चल रहा उपचार*

(जर्नलिस्ट सोन कुमार सिन्हा)

राजधानी रायपुर :जब एक पांच वर्षीय मासूम को अपनों से ही सुरक्षा मिलने के बजाय कथित प्रताड़ना का सामना करना पड़ा, तब उसकी मदद के लिए आगे आए राहुल हरितवाल। संकट की इस घड़ी में उन्होंने केवल संवेदनशीलता नहीं दिखाई, बल्कि तत्काल कार्रवाई करते हुए घायल बच्चे को उपचार दिलाने और उसे सुरक्षित संरक्षण तक पहुंचाने की पहल की। इस पूरे घटनाक्रम में राहुल हरितवाल की मानवीय भूमिका ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि जरूरतमंद की मदद के लिए समय पर उठाया गया कदम किसी की जिंदगी में नई उम्मीद जगा सकता है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रायपुर के पंडरी क्षेत्र स्थित तरुण नगर की स्लम बस्ती में पांच वर्षीय बच्चा गंभीर रूप से घायल अवस्था में था। बताया गया कि बच्चे का सौतेला पिता नशे की हालत में उसके साथ मारपीट करता था। 14 अगस्त की रात भी कथित तौर पर मारपीट की घटना हुई, जिसके बाद बच्चे के हाथ में फ्रैक्चर और चेहरे पर सूजन जैसी चोटें सामने आईं। इस स्थिति में मासूम को तत्काल सहायता की आवश्यकता थी।
*सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे राहुल*

घायल बच्चे की जानकारी भारतीय जनता पार्टी के एनजीओ प्रकोष्ठ से जुड़े रायपुर संयोजक राहुल हरितवाल तक पहुंची। सूचना की गंभीरता को समझते हुए उन्होंने देर किए बिना घटनास्थल पहुंचने का निर्णय लिया। वहां बच्चे की हालत देखकर उन्होंने उसे तत्काल सहायता उपलब्ध कराने की पहल की। इसके बाद वे बच्चे को लेकर पुलिस थाने पहुंचे और फिर उपचार के लिए चिकित्सक डॉ. सुरेंद्र शुक्ला के पास ले गए।
बताया गया कि डॉ. सुरेंद्र शुक्ला ने भी मानवीय संवेदना का परिचय देते हुए बच्चे का निःशुल्क उपचार किया। प्राथमिक उपचार की व्यवस्था के बाद बच्चे को पुलिस के सुपुर्द किया गया, ताकि उसके संरक्षण और आगे की आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
*मां और सौतेला पिता गिरफ्तार, बच्चे को मिल रहा उपचार*
प्रकरण में पुलिस ने बच्चे की मां और सौतेले पिता को गिरफ्तार किया है। वहीं, घायल मासूम का उपचार मेकाहारा अस्पताल में बाल संरक्षण विभाग की निगरानी में जारी है। बच्चे के स्वास्थ्य में सुधार के साथ-साथ उसके लिए सुरक्षित वातावरण और उचित देखभाल सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है, ताकि वह इस कठिन अनुभव से उबरकर सामान्य जीवन की ओर लौट सके।
*राहुल हरितवाल की पहल बनी इंसानियत की मिसाल*
इस घटनाक्रम में राहुल हरितवाल की भूमिका इसलिए उल्लेखनीय है, क्योंकि उन्होंने सूचना मिलने के बाद मामले को नजरअंदाज करने के बजाय स्वयं आगे आकर बच्चे की मदद की। किसी घायल और असहाय बच्चे को समय पर चिकित्सा सहायता दिलाना, पुलिस तक पहुंचाना और उसके संरक्षण की दिशा में पहल करना सामाजिक जिम्मेदारी का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
वहीं, चिकित्सक डॉ. सुरेंद्र शुक्ला द्वारा निःशुल्क उपचार की पहल भी मानवीय सेवा भावना को दर्शाती है। ऐसे प्रयास समाज में यह विश्वास मजबूत करते हैं कि संकट की घड़ी में संवेदनशील लोग आगे आएं तो असहाय व्यक्ति को मदद और सुरक्षा मिल सकती है।
*समाज के सामने एक बड़ा सवाल*
पांच साल की उम्र किसी भी बच्चे के लिए खेलने, सीखने और स्नेह पाने की होती है। इस उम्र में हिंसा और असुरक्षा का सामना करना उसके शारीरिक और मानसिक विकास पर गहरा प्रभाव डाल सकता है। इसलिए बच्चों के प्रति किसी भी प्रकार की प्रताड़ना की जानकारी मिलने पर उसे गंभीरता से लेना और संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाना समाज के प्रत्येक जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य है।
*राहुल हरितवाल की त्वरित पहल ने एक घायल मासूम तक मदद पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।*
यह घटना याद दिलाती है कि इंसानियत केवल संवेदना जताने में नहीं, बल्कि जरूरत के समय जिम्मेदारी निभाने में दिखाई देती है।

रायपुर के ही आम नागरिग अब्बास खान नामक युवक ने राहुल हरितवाल को सूचना दी ।रियल हीरो राहुल हरितवाल की पहचान इसी मानवीय पहल से सामने आई है—जहां एक असहाय बच्चे की पीड़ा को समझकर उसे सहायता, उपचार और संरक्षण दिलाने के लिए कदम उठाए गए।*