*श्रावण के तीसरे सोमवार को प्राचीन शिव मंदिर देवभोग में उमड़ा आस्था का सैलाब, कांवड़ियों ने किया जलाभिषेक*

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*श्रावण के तीसरे सोमवार को प्राचीन शिव मंदिर देवभोग में उमड़ा आस्था का सैलाब, कांवड़ियों ने किया जलाभिषेक*

*रिपोर्ट – नागेश्वर मोरे गरियाबंद*

 

देवभोग- श्रावण मास के तीसरे सोमवार को देवभोग नगर के राजापारा स्थित प्राचीनतम शिव मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। भगवान भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु कांवड़ यात्रा के साथ मंदिर पहुंचे। मंदिर परिसर में भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं और भारी भीड़ के चलते श्रद्धालुओं को अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा।

श्रावण सोमवार के अवसर पर श्रद्धालुओं ने प्राचीन शिवलिंग पर विधि-विधान से जलाभिषेक कर बेलपत्र, फूल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की। पूरे मंदिर परिसर में हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारे गूंजते रहे। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ दूर-दराज से भी श्रद्धालु यहां पहुंचकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं और अपनी मनोकामना पूर्ण होने की कामना करते हैं।

*तीन पीढ़ियों से आस्था का प्रमुख केंद्र*

राजापारा स्थित यह शिव मंदिर देवभोग के सबसे प्राचीन धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह मंदिर करीब तीन पीढ़ियों से श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। समय के साथ नगर और आसपास के क्षेत्रों में काफी बदलाव आया, लेकिन इस प्राचीन मंदिर के प्रति लोगों की आस्था आज भी कायम है।

*राजा नागेंद्र शाह से जुड़ा है मंदिर का इतिहास*

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस प्राचीन शिवलिंग की स्थापना राजा नागेंद्र शाह के समय हुई थी। बताया जाता है कि राजा नागेंद्र शाह द्वारा राजा तालाब और रानी तालाब का निर्माण कराया जा रहा था, उसी दौरान इस शिवलिंग की स्थापना की गई थी। यही वजह है कि मंदिर का इतिहास देवभोग के पुराने राजघराने और उस दौर की धार्मिक परंपराओं से भी जुड़ा हुआ माना जाता है।

आज भी यह मंदिर अपने प्राचीन स्वरूप और ऐतिहासिक धार्मिक महत्व को संजोए हुए है। श्रावण मास में यहां विशेष रूप से श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है और सोमवार के दिन मंदिर में भक्तों का सैलाब देखने को मिलता है।

तीसरे सोमवार को भी सुबह से लेकर शाम तक मंदिर में पूजा-अर्चना का सिलसिला चलता रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना की। प्राचीन शिवलिंग के प्रति लोगों की गहरी आस्था इस बात का प्रमाण है कि देवभोग का यह मंदिर आज भी धार्मिक एवं ऐतिहासिक विरासत के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए है।

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