आदिवासी तीन मासूमों की मौत से बोरतलाव में पसरा सन्नाटा मामला – पानी से भरे मुरूम गड्ढे में डूबने से तीन मासूमों की मौत का

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आदिवासी तीन मासूमों की मौत से बोरतलाव में पसरा सन्नाटा

मामला – पानी से भरे मुरूम गड्ढे में डूबने से तीन मासूमों की मौत का 

 

*परिजनों की रिपोर्ट पर पुलिस ने किया रेलवे ठेकेदार पर एफआईआर दर्ज*

डोंगरगढ़ – क्षेत्र में झकाझोर करने वाली घटना , छोटे छोटे मासूम बच्चे अब नहीं रहे घर का चिराग़ बुझ गया आदिवासी परिवार के साथ साथ गाँव में सन्नाटा छाया हुआ है बोरतलाव थाना क्षेत्र का पूरा मामला है बता दे कि रेलवे द्वारा तीसरी लाइन निर्माण कार्य में बोरतलाव क्षेत्र से पेटी ठेकेदारों के द्वारा किसान की जमीन को समतली करण के नाम पर पचासों किसानों की भूमि से पंचायत की अनुमति के बगैर जगह जगह अवैध उत्खनन कर गहरा गड्ढा कर दिया गया था जिससे ग्रामवासियों में आक्रोश था और उक्त स्थान पर घटना दुर्घटना की संभावनाएं को लेकर पूर्व में अनेकों बार शिकायत की गई थी उसके बावजूद शासन प्रशासन की लापरवाही के कारण तीन मासूमों की असमय मौत से प्रदेश में हड़कंप मच गया। बताया जाता है कि बोरतलाव के गांधीनगर बड़े तालाब जाने वाले मार्ग पर बुधवार को हुई हृदयविदारक हादसे में पानी से भरे मुरूम के गहरे गड्ढे में डूबने से तीन मासूम बच्चों की मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों की शिकायत पर बोरतलाव पुलिस ने रेलवे के कार्य से जुड़े ठेकेदार एवं उसके सहयोगियों के खिलाफ लापरवाही का मामला दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।

पुलिस के अनुसार ग्राम बोरतलाव निवासी राजू मंडावी (59) ने थाना बोरतलाव में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि उनका पुत्र और बहू रोजगार के सिलसिले में सूरत में रहते हैं, जबकि उनके पोते दानिश मंडावी (7 वर्ष) और कृष मंडावी (8 वर्ष) उनके साथ रहते थे। 15 जुलाई को दोनों बच्चे पड़ोसी हितेश कोकाटे (5 वर्ष) के साथ घर से निकले थे, लेकिन शाम तक वापस नहीं लौटे।

शाम करीब 6 बजे परिजनों ने बच्चों की तलाश शुरू की। खोजबीन के दौरान राजू कोडबती के खेत के समीप स्थित पानी से भरे मुरूम के गड्ढे के किनारे बच्चों के कपड़े मिले। इसके बाद ग्रामीणों और परिजनों ने गड्ढे में तलाश की, जहां से तीनों बच्चों के शव बरामद किए गए।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संबंधित स्थान पर रेलवे के तीसरी रेल लाइन निर्माण कार्य के दौरान ठेकेदार द्वारा बड़े पैमाने पर मुरूम और मिट्टी का उत्खनन कराया गया था। उत्खनन के बाद गड्ढों का समतलीकरण या भराव नहीं कराया गया, जिससे बारिश का पानी भर गया और खेत खतरनाक जलाशय बन गया। गड्ढे के आसपास न तो सुरक्षा घेराबंदी की गई थी और न ही किसी प्रकार का चेतावनी बोर्ड लगाया गया था। परिजनों का आरोप है कि ठेकेदार और उसके सहयोगियों की गंभीर लापरवाही के कारण यह दर्दनाक हादसा हुआ।

बोरतलाव पुलिस ने शिकायत के आधार पर रेलवे ठेकेदार एवं उसके सहयोगियों के विरुद्ध संबंधित धाराओं में अपराध पंजीबद्ध कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

घटना के संबंध में यह भी स्पष्ट हुआ है कि जिस स्थान पर हादसा हुआ वह खसरा नंबर 504/1 की भूमि है। प्राथमिक शाला के प्रधान पाठक बिरजू राम ने बताया कि घटना वाले दिन स्कूल में अवकाश जैसी स्थिति थी। शिक्षक फेडरेशन की हड़ताल के कारण संकुल की अधिकांश प्राथमिक शालाएं बंद थीं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मृतक दोनों बच्चे पड़ोस में रहने के कारण सामान्य दिनों में साथ आते-जाते थे, लेकिन घटना वाले दिन विद्यालय का संचालन नहीं हुआ था।

रेलवे ने पल्ला झाड़ा , स्थानीयों ने उठाए सवाल :- पूरे मामले में रेलवे अधिकारियों का कहना है कि हादसा स्थल रेलवे सीमा क्षेत्र से लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित है, इसलिए घटना से रेलवे का कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।

हालांकि स्थानीय ग्रामीणों का दावा है कि बोरतलाव क्षेत्र से रेलवे की तीसरी लाइन परियोजना के लिए बड़े पैमाने पर किसानों से मौखिक आश्वासन पर मुरूम का उत्खनन किया गया था। उनका आरोप है कि खनन के बाद गड्ढों का भराव नहीं कराया गया, जिससे क्षेत्र में कई स्थानों पर गहरे गड्ढे बन गए थे। जिससे बरसात के दिनों में इनमें जलभराव होने से मनुष्य सहित जानवरों के लिए जानलेवा साबित होने की आशंका थी जिसकी शिकायत ग्रामीणों द्वारा जिम्मेदार अधिकारियों को अवगत करा सभी गड्ढों की तत्काल भराई कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई थी ?

*ठेकेदारों वा खनन माफियाओ की मनमानी का आरोप*

मासूमों की मौत पर ग्रामीणों ने बताया कि जब इस विषय को लेकर की गई शिकायत पर शासन प्रशासन द्वारा गंभीरता से विचार कर निराकरण नहीं निकाला गया तो ग्रामीणों द्वारा समाचार पत्रों के माध्यम से रेलवे ठेकेदारों के अनैतिक कार्यों का काला चिट्ठा दिया गया और समाचार प्रकाशित होते ही रेलवे के पेटी ठेकेदारो के द्वारा जांच प्रभावित करने के उद्देश्य से पंचायत के उपसरपंच व पंचों के खिलाफ 2 लाख की उगाही का आरोप लगाते हुए बोरतलाव थाना के सहयोग से फर्जी एफआईआर दर्ज कर प्रताड़ित किया गया और धमकी दिया गया कि तुम कहीं भी शिकायत कर लो कहीं कुछ नहीं होने वाला, उल्टा शिकायत करने वालो को जेल की हवा खिला देंगे ?

*दोषियों पर कड़ी कार्यवाही की मांग आदिवासी समाज ने*

इस मामले पर सर्व *आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष जसवंत गावड़े व जनपद सदस्य सरिता ओमप्रकाश मंडावी* ने शासन प्रशासन से गुहार लगाई गई है कि आदिवासी बच्चों की मौत पर रेलवे कार्य में लगी कंपनी व पेटी ठेकेदारों के द्वारा ग्राम में किए गए अवैध उत्खनन की सूक्ष्मता से जांच कर पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा प्रदान कर दोषियों के ऊपर कठोर कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसी हृदय विदारक घटना की पुनरावृत्ति ना हो।

*तत्कालीन ठेकेदारों के खिलाफ ग्रामीणों के शिकायत पर एफआईआर दर्ज किया गया है= केसरी नंदन नायक एसडीओपी*

डोंगरगढ़ के अनुविभागीय अधिकारी(पुलिस) केसरी नंदन नायक ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए बताया कि पूरे घटना क्रम में सूचना मिलते ही बोरतलाव थाना टिम घटना स्थल पर पहुँच के मौका मुआयना किया ,ग्रामीणों के शिकायत पर रेलवे के लिए कार्यरत्त तत्कालीन ठेकेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया गया है मामले में जो लोग भी दोषी होंगे उन पर कार्यवाही होगी

*अवैध खनन में हुए गड्ढों में डूबने से हुई आदिवासी बच्चों की मौत , सरकार परिवार को मुवाजा देवे= सिन्हा 

पूरे घटना क्रम को लेकर मीडिया क्लेटिव फॉर चाइल्ड के सदस्य सोन कुमार सिन्हा ने कह कि बहुत ही दुखत घटना है अवैध खनन की वजह से अक्सर इस तरह की घटना घट रही है हाल की घटना बहुत ही दुखदाई है घटना में जो लोग भी जिम्मेदार है उन पर कानूनी कार्यवाही होनी चाहिए और मृतक परिवार के परिजनों को मुआवजा मिलना चाहिए

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