नरहरपुर वन परिक्षेत्र के झुरा नाला में 2 करोड़ के विकास कार्यों में भ्रष्टाचार का सनसनीखेज आरोप, ग्रामीण ने कलेक्टर से की उच्चस्तरीय जांच की मांग
_RTI से मांगी थी जानकारी, विभाग ने बताया 1.20 करोड़ खर्च, ग्रामीण का दावा – लागत 2 करोड़ से अधिक | बिल-वाउचर और स्टीमेट में गड़बड़ी का आरोप, बोले – मेरी मौजूदगी में हो भौतिक सत्यापन_
*कांकेर/नरहरपुर – उत्तर बस्तर कांकेर जिले के नरहरपुर विकासखंड में वन विभाग द्वारा कराए गए विकास कार्यों में बड़े भ्रष्टाचार का आरोप लगा है। ग्राम कुरालठेमली निवासी कमलेश कुमार मरकाम ने कलेक्टर को आवेदन देकर झुरा नाला में वर्ष 2019-20 से 2021-22 के बीच कराए गए 200.76 लाख रुपये के नवरा विकास कार्यों की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
*1. क्या है पूरा मामला?
आवेदक कमलेश मरकाम के अनुसार, वन परिक्षेत्र नरहरपुर द्वारा झुरा नाला में तीन वित्तीय वर्षों में *कुल 200.76 लाख रुपये की लागत से नवरा विकास कार्य कराया गया था। आरोप है कि:
– स्टीमेट के अनुरूप काम नहीं हुआ: मौके पर प्राक्कलन के हिसाब से काम नहीं किया गया।
– फर्जी बिल-वाउचर: गुणवत्ताहीन काम कर फर्जी बिल लगाकर सरकारी राशि आहरित कर ली गई।
– जांच की मांग:* प्राक्कलन स्टीमेट मिलान कर भौतिक सत्यापन और बिल वाउचरों की गहन जांच जरूरी है।
*2. RTI से खुला मामला, विभाग और आवेदक के आंकड़ों में अंतर
कमलेश मरकाम ने 16 मार्च 2023 को *सूचना का अधिकार 2005 के तहत वन परिक्षेत्र अधिकारी से कार्यादेश और स्टीमेट की सत्यापित प्रति मांगी थी।
इसके जवाब में वन मंडलाधिकारी कार्यालय, पूर्व भानुप्रतापपुर ने पत्र क्रमांक/तक./2025/5081 दिनांक 21.02.2025 में बताया कि 2019-20 से 2021-22 के बीच झुरा नाला में 120.30 लाख रुपये* के कार्य कराए गए हैं।
जबकि आवेदक का दावा है कि कुल लागत 200.76 लाख रुपये थी। यानी विभाग और आवेदक के आंकड़ों में *80.46 लाख रुपये का अंतर है।
*3. “एकतरफा जांच मंजूर नहीं” – आवेदक
विभाग ने अपने पत्र में कहा कि 02.04.2025 को प्राक्कलन अनुसार भौतिक सत्यापन किया जा चुका है। इस पर आवेदक कमलेश मरकाम ने 12 जून 2023 को कलेक्टर को दिए आवेदन में आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि *जांच उनकी अनुपस्थिति में हुई है, इसलिए वे इस जांच से संतुष्ट नहीं हैं।
उन्होंने कलेक्टर से निवेदन किया है कि जांच के दिन उन्हें सूचित किया जाए ताकि भौतिक सत्यापन उनकी उपस्थिति में हो सके।*
4. आगे क्या?
इस मामले ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस *80 लाख के अंतर और *गुणवत्ताहीन काम* के आरोपों पर क्या कार्रवाई करता है।
आवेदक का पक्ष:_”मैंने जनहित में यह कदम उठाया है। सरकारी पैसे का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं। जांच पारदर्शी होनी चाहिए।”_
– कमलेश कुमार मरकाम,













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