पत्रकारिता पर दबाव या सच की आवाज?
अविनाश डेवलपर्स के लीगल नोटिस पर पत्रकार जगत में उबाल, श्रीप्रकाश तिवारी के समर्थन में उतरे पत्रकार संगठन
रायपुर। छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता जगत में उस समय बड़ा विवाद खड़ा हो गया, जब जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने वाले पत्रकार श्रीप्रकाश तिवारी को अविनाश डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से 10 पन्नों का लीगल नोटिस भेजा गया। इस कार्रवाई के बाद प्रदेशभर के पत्रकार संगठनों और मीडिया जगत में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
बताया जा रहा है कि सवाल 24 न्यूज़ से जुड़े पत्रकार श्रीप्रकाश तिवारी ने हितग्राहियों और आम जनता की शिकायतों के आधार पर अविनाश बिल्डर्स से जुड़े मामलों को अपनी खबरों में प्रमुखता से उठाया था। खबर प्रसारित होने के बाद कंपनी की ओर से कानूनी नोटिस भेजा गया, जिसमें खबर को “मानहानिकारक” बताते हुए सार्वजनिक माफी मांगने की बात कही गई है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद पत्रकार संगठनों ने इसे “सच दबाने की कोशिश” और “मीडिया की आवाज कुचलने का प्रयास” बताया है। वरिष्ठ पत्रकारों का कहना है कि यदि किसी मीडिया संस्थान द्वारा अधूरे प्रोजेक्ट, हितग्राहियों की शिकायतें या कथित अनियमितताओं को सामने लाया जाता है, तो उसका जवाब तथ्यों के आधार पर दिया जाना चाहिए, न कि डराने वाले नोटिसों के जरिए।
पत्रकार संगठनों ने स्पष्ट कहा कि लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका जनता की आवाज उठाने की है। यदि पत्रकार सवाल पूछना छोड़ देंगे, तो आम लोगों की समस्याएं सामने कौन लाएगा? संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि पत्रकारों को डराने-धमकाने का प्रयास जारी रहा, तो प्रदेशभर में आंदोलन किया जाएगा।
सोशल मीडिया में भी इस मामले को लेकर पत्रकारों के समर्थन में आवाजें तेज हो गई हैं। कई पत्रकारों ने लिखा कि “आज श्रीप्रकाश तिवारी को नोटिस भेजा गया है, कल किसी और पत्रकार को भेजा जाएगा। यदि अभी आवाज नहीं उठाई गई, तो भविष्य में जनहित की पत्रकारिता करना मुश्किल हो जाएगा।”
पत्रकार साथियों ने कहा कि जनहित की खबरें दिखाना अपराध नहीं है। यदि किसी हितग्राही के साथ अन्याय हुआ है, तो उसकी आवाज उठाना पत्रकार का कर्तव्य है। ऐसे में नोटिस भेजकर दबाव बनाने की कोशिश पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर सीधा हमला माना जा रहा है।
इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट के राष्ट्रीय सचिव शिव शंकर सोनपिपरे ने कहा कि जल्द ही अविनाश बिल्डर सहित उन अन्य बिल्डरों के खिलाफ उग्र आंदोलन किया जाएगा, जो पत्रकारों को धौंस दिखाकर और कानूनी नोटिस भेजकर डराने की कोशिश करते हैं ताकि उनके खिलाफ खबरें प्रकाशित न हों। उन्होंने कहा कि पत्रकारों की आवाज दबाने का हर प्रयास लोकतंत्र के लिए खतरा है और पत्रकार संगठन इसका मजबूती से विरोध करेंगे।
फिलहाल यह मामला अब केवल एक लीगल नोटिस तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसे पत्रकारिता की स्वतंत्रता बनाम दबाव की लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है। रायपुर सहित प्रदेशभर के पत्रकार संगठन इस मुद्दे पर एकजुट नजर आ रहे हैं और जल्द संयुक्त बैठक एवं विरोध प्रदर्शन की तैयारी की जा रही है।











Leave a Reply