लाल पानी, लाल हवा, लाल मिट्टी — बीएसपी के विकास की कड़वी हकीकत रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य के वादे फेल, ग्रामीणों में उबाल; खदान बंद कर आंदोलन की चेतावनी

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लाल पानी, लाल हवा, लाल मिट्टी — बीएसपी के विकास की कड़वी हकीकत रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य के वादे फेल, ग्रामीणों में उबाल; खदान बंद कर आंदोलन की चेतावनी 

🟥 हाइलाइट (सर्वोच्च छत्ति सगढ न्यूज़)
न स्कूल बना, न अस्पताल, न मिला रोजगार — वादों से टूटा भरोसा

नारायणपुर/रावघाट

रावघाट खदान क्षेत्र में बीएसपी के विकास मॉडल को लेकर अब लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि विकास के नाम पर उनकी जमीन ली गई, लेकिन बदले में उन्हें सिर्फ प्रदूषण, बीमारी और बेरोजगारी मिली।

क्षेत्र में “लाल पानी, लाल हवा और लाल मिट्टी” अब आम बात हो गई है, जिससे लोगों का जीवन संकट में है। खनन से निकली धूल और प्रदूषण ने पर्यावरण को बुरी तरह प्रभावित किया है, वहीं ग्रामीणों के जीवनयापन के संसाधन भी छिनते जा रहे हैं।

सबसे बड़ा मुद्दा रोजगार का है। स्थानीय युवाओं को नौकरी देने का वादा किया गया था, लेकिन तीन साल बाद भी भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी। शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की हालत भी बदहाल है—अब तक न स्कूल बना, न अस्पताल।

परिवहन व्यवस्था कमजोर होने से स्थानीय ट्रांसपोर्टरों की आर्थिक स्थिति भी बिगड़ती जा रही है।

ग्रामीणों और श्रमिकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो 20 अप्रैल 2026 से खदान बंद कर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा। आंदोलन के दौरान किसी भी स्थिति के लिए बीएसपी प्रबंधन और खनन विभाग को जिम्मेदार ठहराया जाएगा।

समिति के अनुसार, 31 मार्च तक समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया गया था, लेकिन समयसीमा के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिससे लोगों का भरोसा टूट गया है।

स्थानीय पत्रकारों की जुबानी-

बीएसपी के वादे जमीन पर नजर नहीं आते-डॉ बेनर्जी

इस पूरे मामले में स्थानीय वरिष्ठ पत्रकार डॉ अभिषेक बेनर्जी बताते है कि रावघाट खदान क्षेत्र में हालात लगातार चिंताजनक होते जा रहे हैं विकास के नाम पर यहां के ग्रामीणों को प्रदूषण, बीमारी और बेरोजगारी का सामना करना पड़ रहा है।

लाल पानी और दूषित हवा ने लोगों का जीवन प्रभावित कर दिया है,भिलाई स्टील प्लांट ने रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य के जो वादे किए गए थे, वे अब तक जमीन पर नजर नहीं आ रहे हैं।स्थानीय लोगों में बढ़ता आक्रोश साफ दिखाई दे रहा है और यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। प्रशासन और संबंधित कंपनी को इस विषय को गंभीरता से लेते हुए जल्द समाधान करना चाहिए।

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