मुख्यमंत्री  साय ने जशपुर सर्किट हाउस में मातृत्व वन का किया लोकार्पण*

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*मुख्यमंत्री  साय ने जशपुर सर्किट हाउस में मातृत्व वन का किया लोकार्पण*

*एक पेड़ माँ के नाम अभियान से जुड़ा जनभावना और पर्यावरण संरक्षण का संदेश*

*लगभग 2 एकड़ क्षेत्र में 400 से अधिक पौधे रोपित*

जशपुरनगर – छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, वनमण्डल जशपुर द्वारा विकसित मातृत्व वन का आज मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने जशपुर स्थित सर्किट हाउस परिसर में लोकार्पण किया। लगभग 2 एकड़ क्षेत्र में विकसित इस मातृत्व वन में 400 से अधिक विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण किया गया है, जो पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक संवेदनाओं के अद्वितीय समन्वय का उदाहरण प्रस्तुत करता है।

मातृत्व वन में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत जिले के जनप्रतिनिधियों द्वारा अपनी माताओं के नाम पर पौधरोपण किया गया। इस पहल ने कार्यक्रम को भावनात्मक और सामाजिक रूप से विशेष महत्व प्रदान किया, जहाँ प्रकृति और मातृत्व के सम्मान को एक साथ जोड़ा गया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष श्री रामप्रताप सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय, नगर पालिका अध्यक्ष श्री अरविंद भगत, नगर पालिकाउपाध्यकश ् यश प्रताप सिंह जूदेव, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, जनपद पंचायअध्यकशश ् गंगाराम भगश् विजय आदित्य सिंह जूदेव, सरगुजा कमिश्नर श्री नरेंद्र दुग्गा, आईजी ्री दीपक कुमार झा, कलेक्टर श्री रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री लाल उमेद सिंह, वनमंडलाधिकारी श्री शशिकुमार, जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक कुमार सहित जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर कहा कि माँ हमारे जीवन की प्रथम गुरु होती हैं और उनका स्थान सर्वोच्च होता है। ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के माध्यम से हम माँ के प्रति सम्मान को प्रकृति से जोड़ रहे हैं। यह पहल आने वाली पीढ़ियों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ सामाजिक मूल्यों को भी सुदृढ़ करेगी। उन्होंने कहा कि मातृत्व वन जैसी पहलें न केवल हरित क्षेत्र बढ़ाने में सहायक होंगी, बल्कि समाज में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का भाव भी विकसित करेंगी।

मातृत्व वन के अंतर्गत पर्यावरणीय एवं औषधीय दृष्टि से महत्वपूर्ण पौधों का चयन कर उनका रोपण किया गया है। इनमें टिकोमा, झारुल, सीताअशोक, गुलमोहर, लक्ष्मीतरु, आंवला, बीजा, सिन्दूर, नागकेसरी, अर्जुन एवं जामुन जैसी प्रजातियाँ प्रमुख हैं। ये पौधे न केवल पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में सहायक होंगे, बल्कि आने वाले समय में औषधीय एवं जैव विविधता के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। मातृत्व वन की स्थापना का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना, माताओं के प्रति सम्मान को प्रकृति के माध्यम से अभिव्यक्त करना तथा नई पीढ़ी में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है। यह पहल ‘हर घर एक पेड़, हर पेड़ में माँ की ममता’ के संदेश को साकार करने की दिशा में एक सार्थक कदम है।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे समाज और पर्यावरण के लिए प्रेरणादायक बताया। मातृत्व वन न केवल हरित क्षेत्र के रूप में विकसित होगा, बल्कि यह भावनात्मक जुड़ाव और पर्यावरणीय चेतना का भी केंद्र बनेगा।

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