रायपुर के तालाबों की कहानी: एक शहर का दर्द*

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*रायपुर के तालाबों की कहानी: एक शहर का दर्द*

रायपुर, छत्तीसगढ़ की राजधानी, कभी तालाबों का शहर कहा जाता था। लेकिन अब यहां के तालाब अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। आरटीआई कार्यकर्ता राकेश चौबे के अनुसार, प्राचीन काल में यहां 300 से ज्यादा तालाब थे, लेकिन अब केवल 109 तालाब बचे हैं ¹ ² ³।

*तालाबों का इतिहास*

रतनपुर रियासत में कुल 1400 तालाबों के प्रमाण मिलते हैं। ब्रिटिश काल में लगभग 3000 से ज्यादा तालाब खुदवाए गए थे। 1995 में कैप्टन ब्लंट की यात्रा रिपोर्ट में भी हजारों तालाबों का जिक्र है ¹ ²।

*तालाबों की गिरती संख्या*

2021 में एनजीटी सुनवाई में सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार कुल 227 तालाब दर्ज थे, लेकिन 2024 में नगर निगम रायपुर के आधिकारिक बयान के अनुसार केवल 109 तालाब बचे हैं। यानी एनजीटी वाले 227 में से तीन साल में अतिरिक्त 66 तालाब लुप्त हो गए 

*क्यों घटे तालाब?*

बढ़ता शहरीकरण, अवैध कब्जा, भूमि माफिया, प्रदूषण और बोरवेल/नल कनेक्शन की बढ़ती संख्या ने तालाबों को खत्म कर दिया है। राजबंधा तालाब, सरजूबंधा और खंटो तालाब जैसे कई तालाबों को पाटकर कॉलोनी, रोड, मॉल, स्कूल और कॉलेज बनाए गए हैं ¹ ² ³

*क्या किया जा सकता है?*

बोरवेल संख्या पर नियंत्रण और रिमोट सेंसिंग से जल प्रबंधन किया जा सकता है। सरकार/नगर निगम को राजस्व रिकॉर्ड अपडेट कर तालाबों को संरक्षित घोषित करना चाहिए। कुछ बचे तालाबों का पुनरुद्धार, जैसे महाराजबंध और बूढ़ा तालाब, किया जा सकता है ¹ ² ⁴।

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