जटाशंकर मंदिर देव स्थल में 15 फरवरी को महाशिवरात्रि महोत्सव**

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*जटाशंकर मंदिर देव स्थल में 15 फरवरी को महाशिवरात्रि महोत्सव** 

*शिवधाम पर्वत में दो एकड़ चट्टानों के बीच विराजमान है शीवलिंग**

*शिवधाम बना आस्था का केंद्र**

डोंगरगढ : नगरीय निकाय क्षेत्र के वार्ड नंबर 11 राम नगर में स्थित गज़मरा रोड बॉस डिपो के पास शिवधाम पर्वत के नाम से प्रसिद्ध श्री जटाशंकर मंदिर देव स्थल इन दिनों श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। 15 फरवरी को महाशिवरात्रि पर्व के अवसर पर यहां भव्य आयोजन की तैयारी की जा रही है। दो एकड़ से ज्यादा चट्टानों के बीच छोटे झाड़ के जंगल और प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित यह देव स्थल वर्षों से भक्तों की आस्था का प्रतीक रहा है। उपरोक्त जानकारी देते हुए हुए श्री जटाशंकर ट्रस्ट समिति के कार्यक्रम संयोजक जितेंद्र सिंह ठाकुर ने प्रेस नोट जारी कर बताया कि बीते वर्ष के भांति इस वर्ष भी 15 फरवरी दिन रविवार को शिवधाम पर्वत मे महाशिवरात्रि पर्व का आयोजन किया जा रहा है ,

महाकाल के भक्तों के मन्नत पूरी होने से इस स्थान की धार्मिक महत्ता को और अधिक बढ़ा दिया है। ऊंची पहाड़ी पर विराजित शिव मंदिर दूर से ही भक्तों को आकर्षित करती है। श्रद्धालुओं के लिए जनसहयोग से सीढ़ियों का निर्माण किया गया महज 20 मिनट का रास्ता तैयार किया गया है, जिसके माध्यम से वे भगवान शिव के समीप पहुंचकर दर्शन कर सकते हैं।यह के शिवलिंग की अद्भुत मान्यता के बारे में मंदिर के पंडित विकास चौधरी ने बताया कि छोटे झाड़ के जंगल में स्थित एक कोने में भगवान शिव स्वयंभू रूप में प्रगट है । स्थानीय जनश्रुति के अनुसार आसपास के कई पेड़ समय के साथ नष्ट हो गए, किंतु यह फिर भी सदस्यों के जागरूकता के चलते पेड़ आज भी हरा-भरा और सुरक्षित है।हजारों के तादाद में पारिजात पौधा है जिसे भक्तजन भगवान की दिव्य उपस्थिति का प्रतीक मानते हैं।

यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं और अपनी मनोकामनाओं के पूर्ण होने की कामना करते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि बाबा महाकाल अपने भक्तों को कभी निराश नहीं करते और सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूर्ण होती है। ट्रस्ट के सचिव भागवत नामदेव ने बताया कि दिन में
महाशिवरात्रि पर्व के बाद इसी दिन रात में विशेष पूजा-अर्चना किया जाता है जो रात 9 समाप्त हो जाती है 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर परिसर में रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप, भजन-कीर्तन भी किया जाता है सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है श्री जटाशंकर मंदिर ट्रस्ट समिति के फाउंडर मेंबर श्रीमती सुषमा कोठारी ने बताया कि महाकाल के भक्तों के सहयोग से भोजन प्रसाद वितरण भी किया जाता है और जो माता बहन उपहवास रहते है उनके लिए अलग से व्यवस्था किया जाता है भक्तों की सुविधा हेतु आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं।

श्रद्धालु दिनभर भगवान शिव का गुणगान करते सीढ़ियों से चढ़ते जाते है और। मंदिर परिसर को आकर्षक विद्युत सजावट और फूलों से सजाया जाएगा।पहाड़ी पाठ देव स्थल केवल महाशिवरात्रि ही नहीं, बल्कि नवरात्रि पर्व पर भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है। शारदीय और चैत्र नवरात्रि के दौरान नौ दिनों तक यहां भक्त माता भक्ति में लीन रहते हैं। जिससे यह स्थल एक समग्र धार्मिक धाम का स्वरूप ले चुका है। छोटे झाड़ के जंगल, शांत वातावरण और प्राकृतिक सौंदर्य के बीच स्थित यह मंदिर श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति और ऊर्जा प्रदान करता है।
समिति के पदाधिकारीशिवधाम पर्वत उत्थान में पदाधिकारियों के अलावा शिव भक्तों का सहयोग रहता है 15 फरवरी दिन रविवार को श्री जटाशंकर मंदिर शिवधाम पर्वत में क्षेत्रवासियों एवं श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर धर्मलाभ लेने की अपील की है।

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