रेलवे बोर्ड की नई गाइडलाइंस, अब पति-पत्नी एक ही जगह कर सकेंगे नौकरी; नहीं रहेंगे एक-दूसरे के अधीन

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 गोरखपुर
 पूर्वोत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल में दो महिला लोको पायलटों के पति दक्षिण रेलवे में तैनात हैं। पति और पत्नी भले ही रेलवे में कार्यरत हैं, लेकिन वे एक-दूसरे से बहुत दूर हैं। जल्द ही उनकी दूरियां समाप्त हो जाएंगी। रेलकर्मी, जीवनसाथी और बच्चों के साथ रह सकेंगे।

रेलवे बोर्ड ने ऐसे महिला-पुरुष रेलकर्मियों की पारिवारिक समस्याओं का संज्ञान लेते हुए अहम निर्णय लिया है। अब रेलकर्मी पति-पत्नी एक जगह, एक स्टेशन पर तैनात हो सकते हैं।

यद्यपि, उनकी तैनाती एक-दूसरे के अधीनस्थ के रूप में नहीं हो सकेगी। रेलवे बोर्ड ने नॉन-गजटेड (अराजपत्रित) कर्मचारियों के लिए पति-पत्नी की एक ही स्थान पर पोस्टिंग को लेकर नई समेकित गाइडलाइंस जारी कर दी हैं।

पांच अगस्त 2026 को जारी आदेश के तहत पुराने निर्देशों को संशोधित करते हुए रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि जहां भी प्रशासनिक रूप से संभव होगा, पति-पत्नी को एक ही स्टेशन पर तैनात करने को प्राथमिकता दी जाएगी।

नई गाइडलाइंस के अनुसार यदि पति-पत्नी एक ही यूनिट में कार्यरत हैं, तो उपलब्ध पद होने पर उन्हें एक ही स्टेशन पर पोस्ट किया जाएगा। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि दोनों में से कोई भी दूसरे के अधीनस्थ के रूप में कार्य न करे। यदि दोनों अलग-अलग यूनिट से हैं, तो भी संबंधित स्टेशन पर उपलब्ध पदों के अनुसार उन्हें साथ रखने का प्रयास किया जाएगा।

आवश्यकता पड़ने पर कैटेगरी परिवर्तन के अनुरोध पर भी सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जा सकेगा। रेलवे बोर्ड ने उन मामलों के लिए भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जहां पति या पत्नी आल इंडिया सर्विस, केंद्रीय सेवा, राज्य सेवा अथवा केंद्रीय एवं राज्य सार्वजनिक उपक्रम में कार्यरत हैं।

ऐसे मामलों में रेलवे कर्मचारी को जीवनसाथी की पोस्टिंग वाली जगह या उसके निकटतम उपलब्ध स्टेशन पर तैनात करने का प्रयास किया जाएगा। बोर्ड ने यह स्वीकार किया है कि कई मामलों में रिक्त पद होने के बावजूद प्रशासनिक कारणों का हवाला देकर कर्मचारियों को जीवनसाथी के स्टेशन पर पोस्टिंग नहीं दी जाती थी।

रेलवे बोर्ड के उप निदेशक संजय कुमार ने लिखे गए पत्र में साफ किया है कि यह संशोधित निर्देश केवल नान-गजटेड रेलवे कर्मचारियों पर लागू होंगे, जबकि गजटेड अधिकारियों की पोस्टिंग पूर्व से लागू नियमों के अनुसार ही की जाएगी।

दो फरवरी 2010 के पुराने आदेश के तहत निपटाए जा चुके मामलों को दोबारा नहीं खोला जाएगा। आल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन ने बोर्ड के इस फैसले को परिवार हितैषी और कर्मचारी कल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।

फेडरेशन के जोनल सेक्रेटरी ओंकार नाथ सिंह का कहना है कि नई व्यवस्था से हजारों ऐसे कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है जो लंबे समय से अपने जीवनसाथी के साथ एक ही स्टेशन पर पोस्टिंग की मांग कर रहे थे।

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