तांदुला जलाशय के रिसॉर्ट निर्माण पर फिर उठे सवाल

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तांदुला जलाशय के रिसॉर्ट निर्माण पर फिर उठे सवाल

पर्यावरण प्रेमियों ने लगाई NGT और केंद्र सरकार से गुहार, प्रशासन ने जांच की कही बात

 

बालोदजिले की जीवनदायिनी तांदुला जलाशय एक बार फिर सुर्खियों में है। बीते दिनों हुई बारिश के बाद जलाशय में जलभराव पूरा होने के साथ ही वह तस्वीरें सामने आईं, जिनसे प्रशासन द्वारा कुछ वर्षों पूर्व जलाशय किनारे बनाए गए रिसॉर्ट पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

पर्यावरण प्रेमियों का आरोप है कि रिसॉर्ट और वाटर पार्क का निर्माण NGT (राष्ट्रीय हरित अधिकरण) के नियमों का खुला उल्लंघन है। स्थानीय पर्यावरण कार्यकर्ता भोज शुभम साहू ने जिला प्रशासन से शिकायत करते हुए कहा है कि जलाशय के वेटलैंड और कैचमेंट एरिया में वाणिज्यिक निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित है, इसके बावजूद पूर्व में पदस्थ अधिकारियों की अनदेखी में निर्माण की अनुमति दी गई।

रिसॉर्ट तक पहुँचा जल, बांध को खतरे की आशंका

शिकायतकर्ता ने यह भी दावा किया है कि रिसॉर्ट परिसर में बांध संरचना से छेड़छाड़ कर एक दीवार बनाई गई, जो हाल ही में जलभराव के दौरान डूबती हुई नजर आई। ऐसे में बांध की सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है।

साथ ही रिसॉर्ट से निकलने वाले गंदे पानी के निष्पादन की कोई व्यवस्था नहीं की गई, जिससे दूषित जल सीधे जलाशय में मिल रहा है। यह स्थिति न केवल पीने योग्य पानी की गुणवत्ता को प्रभावित कर रही है बल्कि हजारों लोगों के जीवन और स्वास्थ्य के लिए खतरा उत्पन्न कर सकती है।

शिकायत पहुँची मुख्यमंत्री और NGT तक

शुभम साहू ने इस पूरे मामले में केवल जिला प्रशासन ही नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय और NGT को भी पत्र लिखकर जांच की मांग की है।

प्रशासन ने कहा – रिपोर्ट आने के बाद होगी कार्यवाही

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए अपर कलेक्टर अजय किशोर लकड़ा ने बताया कि जनदर्शन के माध्यम से यह शिकायत उन्हें प्राप्त हुई है। इससे पहले भी इस संबंध में शिकायत आई थी, जिसकी जांच कर रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी गई थी।

नवीन शिकायत पर जल संसाधन और वन विभाग को जांच के निर्देश दिए गए हैं और रिपोर्ट आने के बाद कार्यवाही की जाएगी।

पहले भी उठ चुके हैं सवाल

तांदुला जलाशय में रिसॉर्ट निर्माण को लेकर इससे पहले भी कई बार आपत्तियां दर्ज हो चुकी हैं। सुशासन तिहार से लेकर जनदर्शन तक आवेदन दिए गए। यहां तक कि प्रभारी मंत्री और जल संसाधन मंत्री से भी शिकायत की गई थी।
पिछले वर्ष भी बारिश के पहले गेट खोलकर रिसॉर्ट को लाभ पहुँचाने का आरोप प्रशासन पर लगा था। शिकायतों की जांच के बाद भी कार्रवाई न होने से यह मामला बार-बार ठंडे बस्ते में जाता रहा है।

इस बार प्रकृति ने उजागर किया सच

इस बार जलाशय का पानी सीधे रिसॉर्ट तक पहुँच गया। ड्रोन से ली गई तस्वीरों ने साफ कर दिया कि रिसॉर्ट न केवल वेटलैंड बल्कि कैचमेंट एरिया में भी बना है। यही वजह है कि प्रशासन की कार्यप्रणाली पर अब और भी गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं।

अब देखना होगा कि इस बार प्रशासन मामले में निष्पक्ष जांच कर कोई ठोस कदम उठाता है या फिर पूर्व की तरह यह शिकायत भी सरकारी फाइलों में गुम हो जाएगी।

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