पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का निधन, लंबे समय से थे अस्वस्थ

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जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का 77 वर्ष की आयु में निधन, राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर, गोवा और मेघालय सहित कई राज्यों के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का आज सुबह निधन हो गया। वे 77 वर्ष के थे और लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उन्होंने दिल्ली स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है।

पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि उनका स्वास्थ्य पिछले कुछ समय से ठीक नहीं था और आज सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शनों के लिए रखा जाएगा, जिसके बाद उनके पैतृक स्थान पर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया संपन्न की जाएगी। हालांकि, अंतिम संस्कार के विस्तृत कार्यक्रम की घोषणा अभी नहीं की गई है।

सत्यपाल मलिक का एक लंबा और प्रभावशाली राजनीतिक करियर रहा है। वे अपनी बेबाक और प्रखर आवाज के लिए जाने जाते थे। उन्होंने जम्मू-कश्मीर (अनुच्छेद 370 हटने के समय), गोवा, मेघालय और बिहार जैसे महत्वपूर्ण राज्यों में राज्यपाल के रूप में कार्य किया। जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल के रूप में उनकी भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही, विशेषकर अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के दौरान।

अपने कार्यकाल के दौरान और बाद में भी वे अपने बेबाक बयानों के लिए अक्सर सुर्खियों में रहे। वे किसानों के आंदोलन और पुलवामा हमले जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखते थे, जो कई बार सरकार की नीतियों से अलग होती थी। उनकी यह निर्भीक छवि उन्हें भारतीय राजनीति में एक अलग पहचान दिलाती थी।

सत्यपाल मलिक का जन्म 24 जुलाई, 1946 को उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के हिसावदा गांव में हुआ था। उन्होंने मेरठ कॉलेज से कानून की पढ़ाई की थी। छात्र राजनीति से शुरुआत करने के बाद, उन्होंने कई बार लोकसभा और राज्यसभा सांसद के रूप में भी सेवा दी। वह कुछ समय के लिए केंद्रीय मंत्री भी रहे।

उनके निधन पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा, “सत्यपाल मलिक जी के निधन से गहरा दुख हुआ है। वह एक कुशल प्रशासक और जननेता थे, जिन्होंने देश की सेवा में अपना जीवन समर्पित कर दिया। दुःख की इस घड़ी में उनके परिवार और समर्थकों के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं।”

भारतीय राजनीति ने आज एक अनुभवी और साहसिक आवाज खो दी है, जिसकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी।

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