रायगढ़ में अडानी संचालित कोयला खदान के लिए 5,000 से अधिक पेड़ों की कटाई, विरोध तेज

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रायगढ़ में अडानी संचालित कोयला खदान के लिए 5,000 से अधिक पेड़ों की कटाई, विरोध तेज

रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में अडानी समूह द्वारा संचालित गारे पाल्मा सेक्टर कोयला ब्लॉक के लिए बड़े पैमाने पर वनों की कटाई की जा रही है। 26 और 27 जून को तमनार तहसील के मुड़ागांव और सरायटोला गांवों में कम से कम 5,000 पेड़ काटे जाने की जानकारी सामने आई है।

परियोजना के विरोध में लगातार स्थानीय ग्रामीण और पर्यावरण कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी दौरान 26 जून को सात लोगों को कथित रूप से अवैध हिरासत में लिया गया। वनों की कटाई के विरोध में एक ग्रामीण ने उसी दिन एक पेड़ के पास पौधा लगाकर अपना विरोध भी दर्ज कराया।

कोयला खदान के लिए 2,500 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण की तैयारी

इस परियोजना का संचालन अडानी समूह महाराष्ट्र राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी लिमिटेड (महाजेनको) के लिए कर रहा है। खदान से अनुमानित 655 मिलियन मीट्रिक टन कोयला निकाले जाने की योजना है। इसके लिए 14 गांव सीधे तौर पर प्रभावित होंगे और लगभग 2,584 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण प्रस्तावित है।

इसमें से 215 हेक्टेयर क्षेत्र वनभूमि है, जिसे पूरी तरह से उजाड़ा जाना तय है। इस क्षेत्र में पहले से छह कोयला खदानें सक्रिय हैं और चार और खदानों पर काम जारी है।

अवैध हिरासत और भारी पुलिस बल की तैनाती

26 जून को ही कम से कम 2,000 पुलिस और सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया ताकि वनों की कटाई का विरोध करने वालों को रोका जा सके। छत्तीसगढ़ एसोसिएशन फॉर जस्टिस एंड इक्वालिटी (CAJE) ने एक बयान जारी कर बताया कि प्रशासन और पुलिस ने प्रभावित ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया।

CAJE ने कहा कि अडानी पावर के कर्मचारियों, पुलिस और वन विभाग के अधिकारियों ने क्षेत्र को घेर कर पेड़ों की कटाई शुरू कर दी। इसी दौरान, 26 जून को ही मजदूरों ने मुड़ागांव और सरायटोला गांवों के जंगल में हजारों पेड़ काट डाले।

एनजीटी और अदालतों में मामला अब भी लंबित

इस परियोजना को लेकर राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) ने पहले भी गंभीर आपत्तियां दर्ज की थीं। NGT ने पाया था कि सितंबर 2019 में हुई सार्वजनिक सुनवाई में ग्रामीणों के विरोध को दर्ज नहीं किया गया और कम से कम 1,000 लोगों को सुनवाई स्थल में प्रवेश से रोका गया था।

NGT ने जनवरी 2023 में परियोजना की पर्यावरण मंजूरी को रद्द कर दिया था, लेकिन इसके कुछ ही महीने बाद केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने अगस्त 2023 में उसी सुनवाई के आधार पर नई मंजूरी दे दी।

इस निर्णय को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता और पर्यावरण कार्यकर्ता पुनः NGT पहुंचे हैं और मामला फिलहाल हरित न्यायालय में लंबित है।

लगातार विरोध प्रदर्शन और याचिकाएं

वनों की कटाई के खिलाफ स्थानीय निवासियों और कार्यकर्ताओं का विरोध लगातार जारी है। सुप्रीम कोर्ट और NGT में याचिकाएं दायर की गई हैं। इसके बावजूद, वनों की कटाई का अभियान जारी है, जिससे क्षेत्र की जैव विविधता और स्थानीय पर्यावरण को गहरा नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।

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