औरंगजेब ने जो घटना घटित कि थी, उससे भी बड़ी घटना काशी में घटित हुई- अविमुक्तेश्वरानंद

औरंगजेब ने जो घटना घटित की थी उससे भी बड़ी घटना काशी में घटित हुई ::- अविमुक्तेश्वरानंद
भारत के धर्म की राजधानी काशी में मंदिर और देव विग्रहों को तोड़े जाने के विरोध में द्विपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मंदिर बचाओ आन्दोलनम के तहत 14 दिन की नंगे पांव पदयात्रा की जिसमे पंचक्रोशी यात्रा भी शामिल था। इस पदयात्रा में स्वामिश्री ने रास्ते मे पड़ने वाले सभी देवताओं से माफी मांगते हुए यह प्रार्थना किये की वे काशीवासियों को ऊपर कोई प्रकोप न डालें।
इसी क्रम में 30 मई को श्रीविद्या मठ में काशी खंडोक्त के देवों की पूजा अर्चना हुई तथा 31 मई को शाम 5:30 बजे प्रेस कांफ्रेंस आयोजित किया गया। मीडिया को संबोधित करते हुए स्वामिश्री ने कहा कि औरंगजेब ने तो मंदिर तोड़कर मज़जिद बनवाया पर अभी की केंद्र और राज्य शासन ने मंदिर और देव विग्रहों को तोड़कर उससे भी ज्यादा बड़ा काशी में घटना घटित कर दिया है। ये लोग हिन्दू हितों के पैरोकार नहीं हैं तथा मूर्ति तोड़ने और तोड़वाने वाला कभी भी हिन्दू नहीं हो सकता। ये लोग मूर्तियों में देवता नहीं देखते अपितु ये हिंदुत्त्व का चोला पहनकर केवल वोट की राजनीति कर रहे हैं।
स्वामिश्री ने मंदिर बचाओ आन्दोलनम के द्वितीय चरण के बारे में मीडिया को विस्तृत रूप से जानकारी दी। उन्होंने कहा वाराणसी जिले में 1333 गांव हैं तथा वाराणसी शहर में 90 वार्ड हैं। हम सभी कुल 1423 स्थानों में मंदिर बचाओ सभा आयोजित कर लोगों तक इस आंदोलन की बात पहुंचाएंगे। यह सभा 3 जून को शुरू होगी तथा समापन 27 जून को किया जाएगा। तत्पश्चात 28 जून से 4 जुलाई तक मंदिर बचाओ महायज्ञ जिसका नाम -“सर्वदेव कोपहर प्रीतिकर” मंदिर बचाओ महायज्ञ होगा जिसमें 3 लाख से ऊपर आहुतियां दी जाएगी।
आगे स्वामिश्री ने बताया कि उत्तराखंड में सुंदरलाल बहुगुणा द्वारा प्रवर्तित “चिपको आंदोलन” काशी में प्रासंगिक होगा। इसके तहत शासन व प्रशासन यदि दोबारा मंदिर तोड़ने आएंगे तो हम सभी आस्थावान लोग मंदिर की दीवार और मूर्तियों के साथ चिपक जाएंगे जिससे प्रशासन को पहला हथौड़ा हमारे ऊपर चलाना होगा। साथ ही हम काशी के समग्र सांस्कृतिक नक्शा तैयार करवा रहे हैं जिससे ऐसे स्थानों के संरक्षण संवर्धन के साथ पूजा आदि किया जा सके। इसी क्रम में आन्दोलनम के लक्ष्य प्राप्ति हेतु प्रभातफेरी, तथ्यसंकलन, हस्ताक्षर अभियान, नुक्कड़ नाटक , बिरहा दंगल, आईटी सेल की स्थापना आदि किये जायेंगे।